मधु श्रावणी 2026: 3 अगस्त से शुरू होगा सौभाग्य का महापर्व, 14 दिनों तक निभाई जाएगी मिथिला की अनोखी परंपरा

मधुबनी/मिथिलांचल: मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं का प्रतीक मधु श्रावणी पर्व इस वर्ष 3 अगस्त 2026 से शुरू होकर 15 अगस्त 2026 तक मनाया जाएगा। नवविवाहित महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखने वाला यह 14 दिवसीय पर्व अखंड सौभाग्य, सुखी दांपत्य जीवन और पति की लंबी आयु की कामना के लिए रखा जाता है। पर्व को लेकर मधुबनी, दरभंगा, सीतामढ़ी, समस्तीपुर, सुपौल और पूरे मिथिलांचल में तैयारियां शुरू हो गई हैं। मधु श्रावणी पर्व सावन माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि से शुरू होकर शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि तक मनाया जाता है। इस दौरान नवविवाहित महिलाएं दिनभर व्रत रखती हैं और भगवान शिव, माता पार्वती तथा नाग देवता की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस व्रत का पालन करने से वैवाहिक जीवन सुखमय रहता है और पति की आयु लंबी होती है। इस पर्व की सबसे खास परंपरा 14 दिनों तक नमक का त्याग है। व्रत रखने वाली महिलाएं इस दौरान केवल सात्विक भोजन ग्रहण करती हैं। मान्यता है कि इससे परिवार में सुख-समृद्धि और दांपत्य जीवन में प्रेम एवं विश्वास बना रहता है। मधु श्रावणी में 'फूल लोढ़ी' की परंपरा का भी विशेष महत्व है। हर शाम नवविवाहित महिलाएं पूजा के लिए फूल चुनती हैं और अगले दिन उन्हीं फूलों से भगवान शिव, माता पार्वती तथा नाग देवता की पूजा करती हैं। पूजा के बाद वे ससुराल से भेजे गए भोजन का ही सेवन करती हैं। यह परंपरा मायके और ससुराल के रिश्तों को मजबूत करने का प्रतीक मानी जाती है। मिथिला में मधु श्रावणी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि यहां की संस्कृति, लोक परंपरा और पारिवारिक मूल्यों का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। हर वर्ष हजारों नवविवाहित महिलाएं पूरे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ इस व्रत का पालन करती हैं। मान्यता है कि इससे अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है और वैवाहिक जीवन सुख, शांति एवं समृद्धि से भर जाता है। — मिथिला हिंदी न्यूज
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