पटना/औरंगाबाद | मिथिला हिन्दी न्यूज
बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (विजिलेंस) की कार्रवाई लगातार जारी है। इसी क्रम में शुक्रवार को औरंगाबाद जिले के रिसिअप थाना में पदस्थापित पुलिस अवर निरीक्षक (दारोगा) उमेश कुमार को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया। आरोपी पर केस से धाराएं हटाने और दो आरोपियों का नाम एफआईआर से निकालने के बदले रिश्वत मांगने का आरोप है।
केस से नाम हटाने के लिए मांगी थी घूस
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के अनुसार, गणपत दुआ गांव निवासी लक्ष्मण राम ने पटना स्थित निगरानी कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि काउंटर केस की जांच कर रहे दारोगा उमेश कुमार विपक्ष द्वारा दर्ज कांड संख्या 159/26 से कुछ धाराएं हटाने और शिकायतकर्ता के दो पुत्रों का नाम एफआईआर से हटाने के एवज में 50 हजार रुपये की मांग कर रहे थे।
रिश्वत नहीं देने पर दी थी गंभीर धाराएं जोड़ने की धमकी
शिकायतकर्ता का आरोप था कि दारोगा ने रिश्वत नहीं देने पर केस में और गंभीर धाराएं जोड़ने की धमकी भी दी थी। शिकायत मिलने के बाद निगरानी ब्यूरो ने मामले का गोपनीय सत्यापन कराया, जिसमें रिश्वत मांगने के आरोप सही पाए गए। इसके बाद आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर ट्रैप की योजना बनाई गई।
ट्रैप टीम ने रंगे हाथ किया गिरफ्तार
वरीय पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार के नेतृत्व में गठित विशेष ट्रैप टीम ने रिसिअप थाना के पीछे स्थित पंचायत भवन के पास जाल बिछाया। जैसे ही शिकायतकर्ता ने आरोपी दारोगा को 50 हजार रुपये सौंपे, पहले से सादे लिबास में मौजूद निगरानी टीम ने उसे रिश्वत की रकम के साथ मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया।
पटना लाकर हो रही पूछताछ
गिरफ्तारी के बाद आरोपी दारोगा को पटना लाया गया है, जहां उससे पूछताछ की जा रही है। निगरानी थाना कांड संख्या 091/26 में दर्ज मामले की कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद आरोपी को विशेष निगरानी अदालत में पेश किया जाएगा।
इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे और अन्य सरकारी विभागों में हड़कंप मच गया है। निगरानी ब्यूरो ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में दोषी अधिकारियों के खिलाफ आगे भी इसी तरह सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
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