बांकीपुर का इतिहास रचने का मौका! BJP का गढ़ भेद पाएंगे प्रशांत किशोर?


बिहार की सबसे चर्चित विधानसभा सीटों में शामिल बांकीपुर एक बार फिर राजनीतिक सुर्खियों में है। यह सीट सिर्फ चुनावी मुकाबले के लिए ही नहीं, बल्कि अपने राजनीतिक इतिहास के कारण भी बेहद खास मानी जाती है। इस सीट से जीतने वाले नेताओं ने राज्य और राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी पहचान बनाई है। ऐसे में जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर के पास भी इतिहास रचने का अवसर माना जा रहा है, हालांकि सब कुछ चुनावी जीत पर निर्भर करेगा।

वर्तमान बांकीपुर विधानसभा सीट वर्ष 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई। इससे पहले यह क्षेत्र पटना पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के नाम से जाना जाता था। इस सीट से कांग्रेस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा), जनता दल, जनक्रांति दल और निर्दलीय उम्मीदवार भी जीत दर्ज कर चुके हैं।

हालांकि वर्ष 1995 के बाद से इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी का दबदबा कायम है। 1995 में नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा ने पहली बार भाजपा के टिकट पर जीत हासिल की। इसके बाद उन्होंने लगातार चार चुनाव (1995, 2000, फरवरी 2005 और नवंबर 2005) जीतकर इस सीट को भाजपा का मजबूत गढ़ बना दिया।

दिसंबर 2005 में नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा के निधन के बाद अप्रैल 2006 में हुए उपचुनाव में उनके पुत्र नितिन नवीन ने जीत दर्ज कर पहली बार विधानसभा में प्रवेश किया। तब से यह सीट भाजपा के कब्जे में बनी हुई है।

अब उपचुनाव में सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या प्रशांत किशोर भाजपा के इस मजबूत किले को भेदकर नया इतिहास रच पाएंगे, या फिर भाजपा अपनी जीत की परंपरा कायम रखेगी।

मिथिला हिन्दी न्यूज

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