दरभंगा जिला परिषद की बैठक में जमकर हंगामा, योजनाओं में भेदभाव और अधिकारियों की गैरहाजिरी पर सदस्यों का प्रदर्शन

दरभंगा: दरभंगा जिला परिषद की सामान्य बैठक सोमवार को अध्यक्ष रेणु देवी की अध्यक्षता में हंगामेदार रही। विभिन्न मुद्दों पर तीखी नोकझोंक और विरोध के कारण बैठक में तय एजेंडों पर विस्तार से चर्चा नहीं हो सकी।
बैठक के दौरान जिला परिषद सदस्यों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, सिंचाई और जिला आपूर्ति विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। सदस्यों का आरोप था कि कई सरकारी योजनाएं केवल कागजों तक सीमित हैं और उनका लाभ आम लोगों तक नहीं पहुंच रहा है। सदस्यों ने सरकारी विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं की कमी, शिक्षक-विद्यार्थी अनुपात में असंतुलन, प्रतिनियोजन पर शिक्षकों की तैनाती तथा स्कूलों की अतिक्रमित भूमि का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। वहीं कृषि विभाग पर फसल क्षतिपूर्ति वितरण में कथित अनियमितता और सिंचाई विभाग के नलकूपों के निष्प्रभावी रहने से किसानों को हो रही परेशानी पर भी सवाल खड़े किए गए। जनवितरण प्रणाली (पीडीएस) में डीलरों की कथित मनमानी और शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होने को लेकर भी सदस्यों ने नाराजगी जताई। बैठक में यह भी आरोप लगाया गया कि कई विभागों के अधिकृत अधिकारी उपस्थित नहीं हुए और उनकी जगह अधीनस्थ कर्मचारियों को भेज दिया गया, जिससे सदस्यों के सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं मिल सका। विरोध के दौरान जिला परिषद की उपाध्यक्ष अरुणा कुमारी के नेतृत्व में कई सदस्य अध्यक्षीय मंच के सामने धरने पर बैठ गए। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली बैठक की कार्यवाही की पुष्टि नहीं कराई गई और 15वीं एवं 16वीं वित्त आयोग तथा पंचम और षष्ठम राज्य वित्त आयोग की योजनाओं के चयन में भेदभाव किया गया है। सदस्यों का कहना था कि योजनाओं के असमान वितरण के कारण कई विकास योजनाओं की राशि समय पर खर्च नहीं हो पा रही है और उनके लैप्स होने का खतरा बढ़ गया है। हालांकि बैठक में उठाए गए आरोपों पर संबंधित विभागों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। मिथिला हिन्दी न्यूज रिपोर्ट: रोहित कुमार सोनू
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