स्पर्म के DNA में बदलाव! नई स्टडी में पुरुषों की फर्टिलिटी पर बड़ा खुलासा

वायु प्रदूषण का असर केवल फेफड़ों और श्वसन तंत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पुरुषों की प्रजनन क्षमता पर भी गंभीर प्रभाव डाल सकता है। एक नई वैज्ञानिक स्टडी में दावा किया गया है कि वायु प्रदूषण स्पर्म के DNA में ऐसे बदलाव कर सकता है, जो जीन्स के काम करने के तरीके को प्रभावित करते हैं और इससे फर्टिलिटी पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, यह अध्ययन European Society of Human Reproduction and Embryology की वार्षिक बैठक में प्रस्तुत किया गया। शोध में पाया गया कि विशेष रूप से ओजोन और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड जैसे प्रदूषकों का संबंध स्पर्म DNA में होने वाले 'एपिजेनेटिक' बदलावों से जुड़ा है। अमेरिका में चार वर्षों तक चले इस अध्ययन में 2,000 से अधिक पुरुषों को शामिल किया गया। इनमें से 1,220 पुरुषों के स्पर्म DNA का छह महीने बाद दोबारा विश्लेषण किया गया। वैज्ञानिकों ने स्पर्म में मौजूद DNA methylation का अध्ययन किया, जो ऐसे रासायनिक टैग होते हैं जो DNA का मूल जेनेटिक कोड बदले बिना जीन्स को चालू या बंद करने में भूमिका निभाते हैं। शोधकर्ताओं ने वायु प्रदूषण के संपर्क से जुड़े स्पर्म DNA में 39 महत्वपूर्ण बदलावों की पहचान की। इनमें ओजोन और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड का प्रभाव सबसे अधिक पाया गया। वैज्ञानिकों का कहना है कि ये एपिजेनेटिक बदलाव पुरुषों की प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं, हालांकि यह अध्ययन अभी कारण-और-प्रभाव को पूरी तरह सिद्ध नहीं करता और इस विषय पर आगे भी शोध की आवश्यकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह अध्ययन इस दिशा में महत्वपूर्ण संकेत देता है कि लंबे समय तक वायु प्रदूषण के संपर्क में रहने से पुरुषों की फर्टिलिटी पर असर पड़ सकता है। हालांकि, केवल इस अध्ययन के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि वायु प्रदूषण सीधे तौर पर बांझपन का कारण बनता है। मिथिला हिंदी न्यूज | रोहित कुमार सोनू
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