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NEET पेपर लीक को लेकर बिहार में उबाल: कई जिलों में छात्रों का प्रदर्शन, पटना में 500 अज्ञात पर केस, 40 हिरासत में; विधानसभा में भी गूंजा मामला
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July 23, 2026
पटना। NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर गुरुवार को बिहार के कई जिलों में छात्रों का आंदोलन तेज हो गया। राजधानी पटना सहित कटिहार, बेगूसराय, वैशाली, दरभंगा, शेखपुरा और लखीसराय में छात्रों ने विरोध-प्रदर्शन किया। कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प, पथराव और लाठीचार्ज की घटनाएं सामने आईं, जिससे पूरे राज्य में माहौल तनावपूर्ण बना रहा।
पटना में प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के बाद पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। कोतवाली, गांधी मैदान और सचिवालय थाना में करीब 500 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। अब तक 40 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा चुकी है। पुलिस का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज, वीडियोग्राफी और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर बाकी आरोपियों की पहचान की जा रही है और कानून के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी।
पुलिस के अनुसार, छात्र और अभ्यर्थी NEET परीक्षा में कथित धांधली और पेपर लीक के विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन कुछ प्रदर्शनकारियों द्वारा प्रतिबंधित क्षेत्र की ओर बढ़ने और पुलिस वाहनों पर पथराव किए जाने के बाद हालात बिगड़ गए। स्थिति नियंत्रण से बाहर होने पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। इस दौरान कई छात्र और पुलिसकर्मी घायल हो गए।
पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बीच कुछ असामाजिक तत्व भी शामिल हो गए थे, जिन्होंने माहौल बिगाड़ने और हिंसा फैलाने का प्रयास किया। पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल वीडियो और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान कर रही है।
पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि हिंसा के पीछे किसी साजिश की भी जांच की जा रही है। कुछ यूट्यूबर्स और सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स की गतिविधियां भी जांच के दायरे में हैं। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कहीं सोशल मीडिया के माध्यम से अफवाह फैलाकर या भड़काऊ सामग्री साझा कर भीड़ को उकसाने की कोशिश तो नहीं की गई।
वैशाली जिले के महुआ में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF) के कार्यकर्ताओं ने प्रतिरोध मार्च निकालकर गांधी चौक पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला दहन किया। छात्र नेताओं ने दिल्ली और पटना में आंदोलनकारियों पर हुए कथित लाठीचार्ज की निंदा करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की।
कटिहार में कलेक्ट्रेट गेट पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई। पथराव के बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया। वहीं बेगूसराय में प्रदर्शनकारी छात्र समाहरणालय पहुंच गए और गेट पर चढ़कर विरोध जताया। प्रदर्शन के दौरान कई बैनर और पोस्टर भी फाड़ दिए गए। प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी।
इस बीच भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने प्रेस वार्ता कर विपक्ष पर छात्र आंदोलन को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों की समस्याओं के समाधान के लिए गंभीर है, लेकिन कुछ राजनीतिक दल आंदोलन की आड़ में अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। उनका यह भी कहना था कि पटना में चिन्हित कई लोगों का छात्र संगठनों या शिक्षा से कोई संबंध नहीं है।
वहीं राजद प्रवक्ता शक्ति यादव ने सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि छात्रों को गुंडा कहना लोकतंत्र का अपमान है और यही युवा भविष्य में सरकार बनाते और बदलते हैं। उन्होंने सरकार से छात्रों की मांगों को गंभीरता से सुनने की अपील की।
छात्र आंदोलन की गूंज बिहार विधानसभा के मानसून सत्र में भी सुनाई दी। विपक्ष ने दोनों सदनों में इस मुद्दे पर जोरदार हंगामा किया, जिसके कारण विधानसभा की कार्यवाही मात्र आठ मिनट और विधान परिषद की कार्यवाही केवल पंद्रह मिनट तक ही चल सकी।
उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी ने सदन में कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करना सभी का अधिकार है, लेकिन हिंसा, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाना और जनप्रतिनिधियों पर हमला किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया।
छात्र और अभ्यर्थी NEET सहित सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता, पेपर लीक की घटनाओं पर प्रभावी रोक, दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई और परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि बार-बार सामने आ रही अनियमितताओं से लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है।
संपादक: रोहित कुमार सोनू
मिथिला हिन्दी न्यूज
