NEET पेपर लीक विवाद: पटना में छात्र आंदोलन उग्र, सड़क से संसद तक गरमाई सियासत

पटना। NEET पेपर लीक मामले, जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर बुधवार को बिहार की राजधानी पटना में बड़ा छात्र आंदोलन देखने को मिला। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के नेतृत्व में हजारों छात्र राजभवन मार्च के लिए निकले। जेपी गोलंबर पहुंचते ही पुलिस ने मार्च को रोकने का प्रयास किया, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति बन गई। प्रदर्शनकारी छात्रों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार बढ़ रहा है और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। छात्रों का कहना था कि जब तक NEET पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होती और उनकी मांगों पर सरकार ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। प्रदर्शन के दौरान राजधानी के कई हिस्सों में हालात बिगड़ गए। डाकबंगला चौराहा पर भाजपा का झंडा लगी कुछ गाड़ियों पर पथराव की घटनाएं सामने आईं। एक फॉर्च्यूनर वाहन को भी निशाना बनाए जाने की सूचना मिली। इसके अलावा भाजपा के एक विधायक की गाड़ी को भी प्रदर्शनकारियों ने घेरने की कोशिश की। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने अतिरिक्त पुलिस बल के साथ BSF और CRPF के जवानों की तैनाती कर दी। बेली रोड, इन्कम टैक्स गोलंबर, हाई कोर्ट और हड़ताली मोड़ तक बड़ी संख्या में छात्र पहुंच गए, जिससे कई घंटों तक यातायात प्रभावित रहा। पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया और भीड़ को नियंत्रित करने का प्रयास किया। हंगामे के दौरान कुछ मीडिया संस्थानों के पत्रकारों के साथ कथित मारपीट और अभद्र व्यवहार की खबरें भी सामने आईं। कुछ पत्रकारों ने आरोप लगाया कि रिपोर्टिंग के दौरान उनके कैमरे और मोबाइल छीनने की कोशिश की गई तथा कई को चोटें भी आईं। यदि इन घटनाओं की पुष्टि होती है, तो यह प्रेस की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय होगा। इसी बीच राजधानी में भाजपा के प्रस्तावित प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यालय के बाहर दोनों दलों के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। दोनों पक्षों के बीच लाठी-डंडे चलने और पथराव की घटनाओं से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। पुलिस ने हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित किया। उधर, संसद के मानसून सत्र में भी NEET पेपर लीक का मुद्दा लगातार गूंज रहा है। विपक्ष केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़ा हुआ है, जबकि सरकार का कहना है कि वह इस मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। विपक्ष का आरोप है कि परीक्षा प्रणाली में गंभीर खामियां हैं, वहीं सरकार का कहना है कि सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं और छात्रों के हितों की रक्षा की जाएगी। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली, परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्रों का भविष्य किसी भी राजनीति से बड़ा है। यदि परीक्षा प्रणाली पर विश्वास कमजोर होता है, तो इसका असर लाखों युवाओं के भविष्य पर पड़ता है। ऐसे में सरकार, विपक्ष, परीक्षा एजेंसियों और छात्र संगठनों—सभी की जिम्मेदारी है कि समाधान संवाद और कानून के दायरे में निकाला जाए। लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध दर्ज कराना हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन हिंसा, पथराव, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना या पत्रकारों पर हमला किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता। वहीं दूसरी ओर, परीक्षा प्रणाली में यदि किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करना भी उतना ही आवश्यक है। आज देश के करोड़ों छात्र यही उम्मीद कर रहे हैं कि उन्हें राजनीति नहीं, बल्कि न्याय और पारदर्शी व्यवस्था मिले। रिपोर्ट: रोहित कुमार सोनू संपादक, मिथिला हिन्दी न्यूज
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