सावन में आस्था का महासंगम: पुपरी का बाबा नागेश्वर नाथ मंदिर, जहां स्वयं प्रकट हुए थे भोलेनाथ, हर मनोकामना होती है पूरी

रिपोर्ट: रोहित कुमार सोनू | संपादक, मिथिला हिंदी न्यूज़
सावन का पावन महीना भगवान शिव की आराधना का सबसे विशेष समय माना जाता है। इस दौरान लाखों श्रद्धालु शिव मंदिरों में जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। मिथिलांचल के सीतामढ़ी जिले के पुपरी नगर में स्थित बाबा नागेश्वर नाथ महादेव मंदिर श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का प्रमुख केंद्र है। मान्यता है कि यहां स्वयं भगवान शिव शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे। यही कारण है कि इस मंदिर में वर्षभर भक्तों का तांता लगा रहता है, जबकि सावन में यहां नेपाल और बिहार के विभिन्न जिलों से हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। करीब 66 वर्ष पहले जिस स्थान पर आज मंदिर है, वहां एक खेल का मैदान हुआ करता था। स्थानीय लोगों के अनुसार कुछ बच्चे वहां कंचा खेल रहे थे। खेल के दौरान एक कंचा जमीन की एक दरार में चला गया। जब बच्चे उसे निकालने के लिए खुदाई करने लगे तो उन्हें जमीन के भीतर एक प्राचीन शिवलिंग मिला। संयोग की बात यह रही कि जिस बच्चे को यह शिवलिंग मिला, उसका नाम नागेश्वर था। इसके बाद लोगों ने इसे भगवान शिव का स्वयं प्रकट होना माना और श्रद्धापूर्वक यहां मंदिर का निर्माण कराया। तभी से यह स्थान बाबा नागेश्वर नाथ महादेव के नाम से प्रसिद्ध हो गया। मंदिर को लेकर अनेक धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से जलाभिषेक और पूजा करने पर भगवान शिव सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले दंपति, गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोग और जीवन की कठिनाइयों से जूझ रहे भक्त बड़ी श्रद्धा के साथ बाबा के दरबार में पहुंचते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बाबा की कृपा से अनेक श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूरी हुई हैं। सावन के महीने में मंदिर परिसर का दृश्य अत्यंत भव्य और भक्तिमय होता है। लाल और पीले वस्त्र धारण किए कांवड़िए "बोल बम" और "ॐ नमः शिवाय" के जयघोष के साथ विभिन्न नदी घाटों से पवित्र जल लेकर बाबा नागेश्वर नाथ का जलाभिषेक करने पहुंचते हैं। दिनभर पूजा-अर्चना, रुद्राभिषेक, भजन-कीर्तन और आरती का आयोजन होता है। नेपाल तथा पूरे मिथिलांचल से आने वाले श्रद्धालुओं के कारण मंदिर परिसर में मेले जैसा माहौल बना रहता है। सीतामढ़ी शहर से लगभग 25 किलोमीटर दूर सीतामढ़ी–पुपरी मुख्य मार्ग पर स्थित यह प्राचीन शिवालय अपनी नेपाली शैली की वास्तुकला के लिए भी प्रसिद्ध है। धार्मिक आस्था के साथ-साथ यह मंदिर मिथिलांचल की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र भी है। सावन में यहां दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं का मानना है कि बाबा नागेश्वर नाथ के दर्शन मात्र से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सच्ची श्रद्धा से मांगी गई हर मनोकामना अवश्य पूरी होती है। रिपोर्ट: रोहित कुमार सोनू संपादक – मिथिला हिंदी न्यूज़
👁️ अब तक पढ़ा गया: बार

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.