बिहार में बाढ़ की स्थिति गंभीर, 11 जिलों में 16.84 लाख लोग प्रभावित; पटना में गंगा ने तोड़ा रिकॉर्ड

पटना। बिहार में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। बिहार और नेपाल में हुई भारी बारिश के कारण राज्य की कई नदियां उफान पर हैं। गंगा, गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, पुनपुन और घाघरा समेत कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। राज्य के 11 जिलों में करीब 16.84 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। पटना में गंगा के बढ़ते जलस्तर ने चिंता बढ़ा दी है। गांधी घाट पर शनिवार सुबह करीब 10 बजे नदी का जलस्तर 50.52 मीटर के उच्चतम बाढ़ स्तर यानी HFL को पार कर गया। शाम चार बजे जलस्तर 50.57 मीटर दर्ज किया गया। रविवार सुबह यह बढ़कर करीब 50.62 मीटर पहुंच गया। यह वर्ष 2016 में दर्ज उच्चतम बाढ़ स्तर से करीब पांच सेंटीमीटर अधिक है। गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर पटना के निचले इलाकों में भी दिखाई देने लगा है। वार्ड 22ए के मखदुमपुर में बाढ़ का पानी पहुंच गया है। कुर्जी मोड़ गेट नंबर 86 से राजेंद्र घाट गेट नंबर 92 तक अंडरपास में भी पानी भर गया है। वहीं फुलवारी और संपतचक प्रखंड की सीमा के पास पुनपुन नदी किनारे कूड़ा नवादा बंगला में रिंग बांध में रिसाव के बाद शुक्रवार रात बांध टूट गया। इसके बाद पुनपुन नदी का पानी गांव में फैल गया। जल संसाधन विभाग के अनुसार डुमरियाघाट और हाजीपुर में गंडक नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। बलतारा में कोसी और खगड़िया में बूढ़ी गंडक का जलस्तर भी लाल निशान के ऊपर है। गंगा दीघा, हाथीदह, भागलपुर, कहलगांव, बक्सर और मुंगेर में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। श्रीपालपुर में पुनपुन और दरौली में घाघरा नदी का जलस्तर भी खतरे के निशान को पार कर चुका है। गंगा के जलस्तर में तेजी से हुई वृद्धि को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने संबंधित जिलों को हाई अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया है। जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को बेतार संदेश भेजकर संवेदनशील इलाकों पर लगातार नजर रखने को कहा गया है। बिहार में सितंबर के दौरान अब तक करीब 60.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गयी है, जो सामान्य से लगभग 69 फीसदी अधिक है। लगातार बारिश और नेपाल से आने वाले पानी के कारण नदियों के जलस्तर में तेजी से वृद्धि हो रही है। पटना के पंडारक में शनिवार सुबह गंगा का जलस्तर 43.78 मीटर दर्ज किया गया। यहां पिछला HFL 16 अगस्त 2021 को 43.73 मीटर दर्ज किया गया था। पुनपुन नदी का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है। शनिवार सुबह श्रीपालपुर में इसका जलस्तर 53.28 मीटर दर्ज किया गया, जबकि यहां वर्ष 1976 में 53.91 मीटर का उच्चतम बाढ़ स्तर दर्ज किया गया था। मुंगेर में गंगा खतरे के निशान से करीब 30 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। कटिहार के कुरसेला में कोसी नदी का जलस्तर खतरे के निशान से करीब 31 सेंटीमीटर ऊपर दर्ज किया गया है। अगले 24 घंटे में जलस्तर और बढ़ने की संभावना जतायी गयी है। सारण जिले के दिघवारा में केसरपुर के पास माही नदी का बांध टूटने के बाद आसपास के इलाकों में पानी फैल गया है। छपरा-हाजीपुर NH-19 पर करीब एक फीट पानी बह रहा है। सोनपुर के करीब 65 गांवों के डेढ़ लाख लोग प्रभावित बताए जा रहे हैं। छपरा सदर प्रखंड के नौ गांवों में भी करीब 54 हजार लोग बाढ़ की चपेट में हैं। दिघवारा की अकिलपुर पंचायत में भी बाढ़ का पानी फैल गया है। बक्सर के चौसा, बक्सर और इटाढ़ी समेत कई प्रखंडों के तटवर्ती गांवों का सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है। हाजीपुर और लालगंज में गंडक नदी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। लालगंज में नदी का जलस्तर करीब 1.07 मीटर और हाजीपुर में करीब 26 सेंटीमीटर ऊपर बताया गया है। हाजीपुर शहर के छह वार्ड प्रभावित हुए हैं। राघोपुर प्रखंड के 76 गांवों में बिजली आपूर्ति बाधित है। बिदुपुर में बाढ़ के पानी में डूबने से एक युवक की मौत की भी जानकारी है। कोसी-सीमांचल और पूर्वी बिहार के जिलों में भी बाढ़ का असर बढ़ रहा है। मुंगेर, लखीसराय और भागलपुर के शहरी इलाकों में पानी पहुंचने लगा है। भागलपुर में तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय परिसर में करीब पांच फीट पानी पहुंच गया है, जबकि इंजीनियरिंग कॉलेज में भी करीब तीन फीट पानी भर गया है। बराजों से छोड़े जा रहे पानी में भी लगातार बदलाव हो रहा है। सोन के इंद्रपुरी बराज से पानी का डिस्चार्ज घटा है। शनिवार सुबह आठ बजे यहां से 4,15,719 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था, जो शाम चार बजे घटकर करीब 2.58 लाख क्यूसेक रह गया। दूसरी ओर कोसी के वीरपुर बराज से पानी का डिस्चार्ज सुबह 1,67,560 क्यूसेक से बढ़कर शाम चार बजे 1,91,585 क्यूसेक हो गया। गंडक के वाल्मीकिनगर बराज से भी डिस्चार्ज सुबह 1,26,500 क्यूसेक से बढ़कर शाम चार बजे 1,45,700 क्यूसेक हो गया। बाढ़ का असर रेल परिचालन पर भी पड़ने लगा है। पुनपुन घाट स्थित रेल पुल संख्या-21 पर पानी डाउन लाइन के गार्डर से करीब 10 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया है। इसके कारण पटना-गया रेलखंड पर ट्रेनों का परिचालन प्रभावित हुआ है। 6 सितंबर को इस रूट की 10 MEMU ट्रेनें रद्द रहेंगी, जबकि दो एक्सप्रेस ट्रेनों के मार्ग में भी बदलाव किया गया है। बाढ़ से पटना, अरवल, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार और अररिया जिले प्रभावित हैं। इन जिलों के 50 प्रखंडों और 201 पंचायतों में करीब 16.84 लाख लोगों के प्रभावित होने की जानकारी है। लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन अलर्ट पर है और संवेदनशील इलाकों में राहत एवं बचाव की तैयारियां तेज कर दी गयी हैं। मिथिला हिन्दी न्यूज संपादक: रोहित कुमार सोनू
👁️ अब तक पढ़ा गया: बार

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.