पटना। बिहार में बाढ़ और कई इलाकों में सूखे जैसी स्थिति को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने रविवार को राज्य सरकार पर बाढ़ और सूखे से प्रभावित लोगों के प्रति संवेदनहीन रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने सरकार से बाढ़ एवं सूखा प्रभावित परिवारों और किसानों को तत्काल आर्थिक सहायता देने की मांग की।
तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि एक तरफ बिहार के कई हिस्सों में लोग बाढ़ से परेशान हैं और दूसरी ओर सूखे की स्थिति से किसान प्रभावित हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर हुए ‘दीया-बाती’ कार्यक्रम में करोड़ों रुपये खर्च किए जाने को लेकर भी सवाल उठाया। उनके मुताबिक, जब बाढ़ प्रभावित लोगों को राहत की जरूरत है, तब सरकार को खर्च की प्राथमिकताओं पर ध्यान देना चाहिए।
तेजस्वी यादव ने कहा कि बाढ़ से बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं और किसानों की फसल को भी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने सूखे से प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कराने की मांग करते हुए कहा कि प्रभावित किसानों को 15 हजार रुपये प्रति एकड़ की आर्थिक सहायता दी जानी चाहिए। उन्होंने आपदा पीड़ितों के लिए बजट में पर्याप्त प्रावधान करने की भी मांग की।
उन्होंने केंद्र सरकार से बिहार की बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने और विशेष पैकेज देने की मांग भी दोहराई। तेजस्वी यादव ने एनडीए के सांसदों और केंद्रीय मंत्रियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनता उनसे बाढ़ राहत को लेकर जवाब मांगेगी। इससे पहले भी वह केंद्र से बिहार के लिए विशेष पैकेज की मांग कर चुके हैं।
दूसरी ओर, जेडीयू की ओर से तेजस्वी यादव के आरोपों पर पलटवार किया गया है। पार्टी नेताओं ने उनके बाढ़ संबंधी बयानों को तथ्यों से परे बताते हुए कहा कि राज्य सरकार प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव का काम कर रही है। जेडीयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने आरोप लगाया कि तेजस्वी यादव मीडिया में बने रहने के लिए ऐसे बयान दे रहे हैं और जनता को भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत के लिए सामुदायिक रसोइयां और राहत शिविर संचालित किए गए हैं। 16 सितंबर को आपदा प्रबंधन विभाग के हवाले से जारी जानकारी के मुताबिक उस समय 12 राहत शिविर और 784 सामुदायिक रसोई संचालित थीं तथा 1.62 करोड़ से अधिक लोगों को सुबह-शाम भोजन उपलब्ध कराया जा चुका था। इससे पहले 13 सितंबर को 1,251 सामुदायिक रसोइयों के संचालन की जानकारी दी गई थी, इसलिए राहत व्यवस्था के आंकड़े अलग-अलग तारीखों पर बदलते रहे हैं।
केंद्र की ओर से भी बाढ़ से हुए नुकसान का जायजा लेने के लिए केंद्रीय स्तर पर अधिकारियों और मंत्रियों की गतिविधियां हुई हैं। कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 16 सितंबर को बिहार का दौरा कर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों, किसानों की फसल क्षति और राहत कार्यों की समीक्षा की थी।
बिहार में बाढ़ और सूखे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब किसानों और प्रभावित परिवारों के लिए अतिरिक्त सहायता, फसल क्षति का आकलन तथा केंद्र से मिलने वाली मदद प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं। राहत और पुनर्वास से जुड़े अंतिम आंकड़े तथा किसानों को मिलने वाली अतिरिक्त सहायता की स्थिति सरकार और संबंधित विभागों के आधिकारिक निर्णयों के बाद ही स्पष्ट होगी।
मिथिला हिन्दी न्यूज | रोहित कुमार सोनू
संपादक: रोहित कुमार सोनू