नई दिल्ली। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने मेडिकल, अलाइड और हेल्थकेयर क्षेत्र में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के लिए डिग्री स्ट्रक्चर में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद यूजीसी ने 27 अगस्त 2026 को भारत के राजपत्र (Gazette of India) में डिग्री के स्पेसिफिकेशन से संबंधित संशोधन प्रकाशित किया है। यह बदलाव शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होने की जानकारी दी गई है।
यूजीसी की ओर से किए गए इस संशोधन में अलाइड और हेल्थकेयर प्रोग्राम के तहत कुछ डिग्रियों के नाम और उनके स्पेशलाइजेशन को नए तरीके से वर्गीकृत किया गया है। इसके तहत दो मास्टर्स डिग्रियों को सामान्य (General) डिग्री की श्रेणी से हटाकर विशेष स्पेशलाइजेशन वाली डिग्री की कैटेगरी में शामिल किया गया है।
यूजीसी का यह संशोधन वर्ष 2014 में जारी डिग्री के स्पेसिफिकेशन से संबंधित नियमों में किया गया पांचवां संशोधन है। नए नोटिफिकेशन में अलाइड और हेल्थकेयर प्रोग्राम के तहत निर्धारित डिग्री नाम और उनके स्पेशलाइजेशन की सूची भी दी गई है।
इस बदलाव का उद्देश्य अलाइड और हेल्थकेयर क्षेत्र में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की डिग्री को उनके अध्ययन के विशिष्ट क्षेत्र के अनुरूप अधिक स्पष्ट पहचान देना है। इससे संबंधित पाठ्यक्रम पूरा करने वाले विद्यार्थियों की डिग्री में उनके स्पेशलाइजेशन को स्पष्ट रूप से दर्शाने की व्यवस्था होगी।
नए नियमों के अनुसार संबंधित विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों को संशोधित डिग्री नाम और स्पेशलाइजेशन के प्रावधानों के अनुरूप अपनी शैक्षणिक व्यवस्था को लागू करना होगा। इससे विद्यार्थियों को अपनी विशेषज्ञता के क्षेत्र की स्पष्ट पहचान मिलने की उम्मीद है।
यूजीसी के मुताबिक ये संशोधन भारत के राजपत्र में नोटिफिकेशन प्रकाशित होने की तारीख से प्रभावी होंगे। हालांकि विद्यार्थियों और संस्थानों को यह भी देखना होगा कि उनका संबंधित कार्यक्रम नए नियमों के दायरे में किस प्रकार आता है और विश्वविद्यालय की ओर से इसके लिए क्या प्रक्रिया निर्धारित की जाती है।
मिथिला हिन्दी न्यूज | रोहित कुमार सोनू
संपादक: रोहित कुमार सोनू