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पितृपक्ष 2026: गया जाने वाले श्रद्धालु अभी कर लें ट्रेन टिकट की तैयारी, 27 सितंबर से शुरू होगा श्राद्ध पक्ष
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September 06, 2026
गया। गया जी में पितरों का तर्पण और पिंडदान करने के लिए देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस वर्ष पितृपक्ष की मुख्य श्राद्ध तिथियां 27 सितंबर से 10 अक्टूबर 2026 तक रहेंगी, जबकि पूर्णिमा श्राद्ध 26 सितंबर को होगा। पितृपक्ष के दौरान गया आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में काफी बढ़ जाती है। ऐसे में ट्रेन से यात्रा करने वाले लोगों के लिए टिकट की तैयारी अभी से करना जरूरी है।
वर्तमान रेलवे आरक्षण नियमों के अनुसार सामान्य आरक्षित टिकट यात्रा की तारीख से 60 दिन पहले बुक किया जा सकता है। शुरुआती दिन बुकिंग सुबह 8 बजे के बाद शुरू होती है। हालांकि कुछ इंटरसिटी और डे ट्रेनों के लिए अग्रिम आरक्षण अवधि 60 दिन से कम हो सकती है। पितृपक्ष के दौरान ट्रेनों में भारी भीड़ रहने की संभावना को देखते हुए आखिरी समय में टिकट मिलने में परेशानी हो सकती है।
दिल्ली और नई दिल्ली से गया आने वाले श्रद्धालुओं के लिए कई प्रमुख ट्रेनें उपलब्ध हैं। हावड़ा-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस और सियालदह-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस समेत कई लंबी दूरी की ट्रेनें गया होकर गुजरती हैं। यात्रा की तारीख के अनुसार ट्रेन का परिचालन और गया जंक्शन पर ठहराव जरूर जांच लेना चाहिए।
हावड़ा और कोलकाता से गया आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी कई रेल विकल्प मौजूद हैं। हावड़ा-जोधपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस और नेताजी एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें गया जंक्शन को जोड़ती हैं। मौजूदा समय-सारिणी के अनुसार हावड़ा-जोधपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस सुबह करीब 6:25 बजे गया पहुंचती है और लगभग 6:30 बजे आगे रवाना होती है।
पटना से गया आने वाले श्रद्धालुओं के लिए रेल यात्रा अपेक्षाकृत आसान है। रांची जनशताब्दी एक्सप्रेस, पटना-रांची वंदे भारत एक्सप्रेस, इंटरसिटी एक्सप्रेस, पटना-सिंगरौली एक्सप्रेस और पलामू एक्सप्रेस समेत कई ट्रेनें पटना और गया के बीच चलती हैं। रांची जनशताब्दी एक्सप्रेस पटना से सुबह करीब 6:10 बजे रवाना होकर लगभग 7:55 बजे गया पहुंचती है, जबकि पटना-रांची वंदे भारत एक्सप्रेस सुबह करीब 7 बजे पटना से चलकर लगभग 8:20 बजे गया पहुंचती है।
वाराणसी और आसपास के इलाकों से गया आने वाले श्रद्धालुओं को अपनी यात्रा की तारीख के अनुसार सीधी ट्रेन और पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन के रास्ते उपलब्ध कनेक्शन की जानकारी जांचनी चाहिए। पितृपक्ष के दौरान रेलवे की ओर से विशेष ट्रेनें चलाने, अतिरिक्त ठहराव देने या परिचालन में बदलाव करने की संभावना रहती है। इसलिए टिकट बुक करने से पहले संबंधित तारीख का अपडेटेड शेड्यूल देखना जरूरी होगा।
गया जंक्शन पहुंचने के बाद श्रद्धालु ऑटो, ई-रिक्शा, टैक्सी और अन्य स्थानीय साधनों से विष्णुपद मंदिर तथा पिंडदान के प्रमुख स्थलों तक पहुंच सकते हैं। पितृपक्ष के दौरान स्टेशन और शहर के प्रमुख मार्गों पर भारी भीड़ रहने की संभावना है। ऐसे में स्टेशन से धार्मिक स्थलों तक पहुंचने के लिए सामान्य दिनों की तुलना में अधिक समय लेकर चलना बेहतर रहेगा।
अगर सामान्य आरक्षण में टिकट नहीं मिल पाता है तो यात्री तत्काल टिकट का विकल्प भी देख सकते हैं। रेलवे के नियमों के अनुसार तत्काल आरक्षण यात्रा से एक दिन पहले खुलता है। एसी श्रेणी के लिए बुकिंग सुबह 10 बजे और गैर-एसी श्रेणी के लिए सुबह 11 बजे शुरू होती है। हालांकि पितृपक्ष जैसे व्यस्त समय में तत्काल टिकट मिलना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
पितृपक्ष का अंतिम दिन 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा। अंतिम दिनों में गया आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ सकती है। जिन लोगों की श्राद्ध तिथि पितृपक्ष के अंतिम दिनों में है, उन्हें ट्रेन टिकट के साथ ठहरने की व्यवस्था भी पहले से कर लेनी चाहिए।
यात्रा से पहले ट्रेन नंबर, परिचालन के दिन, गया जंक्शन पर ठहराव, पहुंचने और प्रस्थान का समय तथा सीट की उपलब्धता जरूर जांच लें। रेलवे समय-सारिणी और विशेष ट्रेनों के परिचालन में बदलाव कर सकता है। इसलिए टिकट बुक करते समय आधिकारिक रेलवे आरक्षण प्रणाली पर यात्रा की तारीख के अनुसार ताजा जानकारी देखना जरूरी है।
मिथिला हिन्दी न्यूज
संपादक: रोहित कुमार सोनू
