भारत की सनातन परंपराओं में कई ऐसे व्रत और त्योहार हैं जो परिवार की खुशहाली और संतानों के कल्याण के लिए समर्पित हैं। इन्हीं में से एक है जितिया व्रत, जिसे जीवित्पुत्रिका व्रत भी कहा जाता है। बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के कई हिस्सों में यह पर्व अत्यंत श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। वर्ष 2026 में यह पावन व्रत 3 अक्टूबर, शनिवार को रखा जाएगा।
जितिया व्रत मातृत्व की शक्ति, त्याग और समर्पण का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है। इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए 24 घंटे तक निर्जला उपवास रखती हैं। इस व्रत की कठिनाई का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि व्रती महिलाएं पूरे दिन और रात बिना जल ग्रहण किए भगवान से अपने बच्चों की रक्षा की प्रार्थना करती हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में इस पर्व का विशेष महत्व है। गांवों में महिलाएं समूह बनाकर पारंपरिक गीत गाती हैं और पूरी श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना करती हैं। धार्मिक मान्यता है कि जितिया व्रत करने से संतान पर आने वाले बड़े से बड़े संकट भी टल जाते हैं।
आज भी लाखों महिलाएं इस व्रत को उतनी ही निष्ठा से करती हैं जितनी सदियों पहले किया जाता था। यही कारण है कि जितिया व्रत केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि मातृत्व के त्याग और प्रेम का जीवंत उदाहरण बन गया है।
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