मिथिला हिन्दी न्यूज | रोहित कुमार सोनू, संपादक
बिहार में युवाओं के बीच त्वचा संबंधी समस्याएं तेजी से चिंता का विषय बनती जा रही हैं। गोरा होने और रातोंरात चेहरे के दाग-धब्बों से छुटकारा पाने की चाहत में कई युवा बिना चिकित्सकीय सलाह के फेयरनेस क्रीम और अन्य कॉस्मेटिक उत्पादों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसका असर उनकी त्वचा पर पड़ रहा है। एम्स पटना के चर्म रोग विभाग द्वारा किए गए एक अध्ययन में युवाओं के बीच मुंहासों की समस्या को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आने का दावा किया गया है।
बताई गई अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में 18 वर्ष से अधिक उम्र के लगभग 50 से 60 प्रतिशत युवा मुंहासों की समस्या से प्रभावित हैं। आमतौर पर मुंहासों को किशोरावस्था से जुड़ी समस्या माना जाता है, लेकिन अब 25 वर्ष की आयु के बाद भी बड़ी संख्या में युवाओं में यह परेशानी बनी रह रही है। चेहरे पर बार-बार मुंहासे निकलना, दाग-धब्बे रह जाना और त्वचा का असामान्य रूप से संवेदनशील होना युवाओं की चिंता बढ़ा रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, बिना डॉक्टर की सलाह के स्टेरॉयड युक्त फेयरनेस क्रीम का इस्तेमाल त्वचा के लिए नुकसानदेह हो सकता है। ऐसी क्रीम के अनुचित या लंबे समय तक इस्तेमाल से त्वचा पतली पड़ने, लालिमा, जलन, मुंहासों जैसी समस्याएं और त्वचा की प्राकृतिक संरचना में बदलाव होने का खतरा रहता है। कई बार शुरुआती दिनों में त्वचा साफ और चमकदार दिखाई देती है, लेकिन बाद में गंभीर दुष्प्रभाव सामने आ सकते हैं।
बदलती जीवनशैली भी त्वचा संबंधी समस्याओं को बढ़ाने वाले कारकों में शामिल हो सकती है। अनियमित दिनचर्या, पर्याप्त नींद की कमी, तनाव और त्वचा की सही देखभाल नहीं करने से परेशानी बढ़ सकती है। हालांकि, मुंहासों के पीछे हार्मोनल बदलाव, आनुवंशिक कारण और अन्य चिकित्सकीय स्थितियां भी जिम्मेदार हो सकती हैं।
चर्म रोग विशेषज्ञों की सलाह है कि चेहरे पर मुंहासे या दाग-धब्बे होने पर खुद से दवाइयां और स्टेरॉयड युक्त क्रीम लगाने के बजाय त्वचा रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। त्वचा के प्रकार के अनुसार सही उपचार अपनाना और बिना चिकित्सकीय सलाह के फेयरनेस क्रीम का इस्तेमाल नहीं करना जरूरी है।
मिथिला हिन्दी न्यूज | रोहित कुमार सोनू, संपादक
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