बिहार के 5.5 लाख शिक्षकों का बढ़ा आक्रोश, 7वें वेतनमान के लिए 2 अक्टूबर से पटना में आमरण अनशन

पटना: बिहार के करीब 5.5 लाख राज्यकर्मी शिक्षक 7वें वेतनमान का लाभ नहीं मिलने से नाराज हैं। शिक्षकों का कहना है कि राज्यकर्मी का दर्जा मिलने के बावजूद उन्हें अन्य सरकारी कर्मचारियों के समान 7वें वेतन आयोग के अनुरूप वेतन और भत्ते नहीं मिल रहे हैं। इस मांग को लेकर शिक्षकों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। शिक्षकों ने पहले काली पट्टी बांधकर विद्यालयों में शिक्षण कार्य किया और सरकार के खिलाफ विरोध जताया। शिक्षक संगठनों का कहना है कि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित किए बिना अपने अधिकारों के लिए आंदोलन जारी रखा जाएगा। शिक्षक दिवस के मौके पर राज्य के कई जिलों में सत्याग्रह और विरोध मार्च भी निकाला गया। अब शिक्षक संगठनों ने आंदोलन को और बड़ा करने की चेतावनी दी है। संगठनों के अनुसार, यदि सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं लेती है तो 2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती से पटना में अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू किया जाएगा। शिक्षकों की प्रमुख मांग 7वें वेतन आयोग के अनुरूप पूर्ण वेतनमान और पे-मैट्रिक्स लागू करने की है। इसके अलावा सभी श्रेणी के शिक्षकों के लिए समान वेतन, सक्षमता परीक्षा पास शिक्षकों को वरीयता और प्रमोशन, महंगाई भत्ता, मकान किराया भत्ता, यात्रा भत्ता तथा अन्य सरकारी सुविधाएं देने की मांग भी की जा रही है। शिक्षक संगठनों के अनुसार, यदि 7वां वेतनमान और पे-मैट्रिक्स लागू होता है तो शिक्षकों की मासिक आय में करीब 15 हजार रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि, इसे लागू करने पर राज्य सरकार पर हर साल 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ने का अनुमान है। शिक्षकों का यह आंदोलन ऐसे समय में तेज हुआ है जब बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर चुनाव प्रस्तावित हैं और इनमें चार सीटें शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की हैं। ऐसे में शिक्षकों की नाराजगी राजनीतिक दलों के लिए भी महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकती है। अब निगाहें सरकार के रुख पर टिकी हैं कि वह शिक्षकों की मांगों पर बातचीत कर समाधान निकालती है या आंदोलन 2 अक्टूबर से और तेज होता है। मिथिला हिन्दी न्यूज संपादक: रोहित कुमार सोनू 
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