बिहार में संदिग्ध राशनकार्डों और उनमें दर्ज सदस्यों का अब घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन किया जाएगा। खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के निर्देश पर इस संबंध में जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। राज्यभर में कुल 6,68,830 संदिग्ध राशनकार्ड चिह्नित किए गए हैं। इनमें से संबंधित जिले के 69,562 राशनकार्ड जांच के दायरे में हैं।
इस अभियान के तहत ब्लॉक और निकायवार जांच दलों का गठन किया गया है। जांच के दौरान राशनकार्डधारियों के घर जाकर यह पता लगाया जाएगा कि कार्ड में दर्ज सदस्य वास्तव में संबंधित पते पर निवास करते हैं या नहीं। यदि राशनकार्डधारी अपने पते पर निवासरत पाए जाते हैं, तो कार्ड के मुखिया और उसमें दर्ज सभी सदस्यों के आधार नंबर, निवास पता और अन्य संबंधित दस्तावेजों का मिलान किया जाएगा।
जांच दलों को 3 अक्टूबर तक भौतिक सत्यापन पूरा कर रिपोर्ट खाद्य शाखा में जमा करने का निर्देश दिया गया है। सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर अपात्र और डुप्लीकेट राशनकार्डों की जानकारी आरसीएमएस पोर्टल पर दर्ज की जाएगी। इसके बाद 10 अक्टूबर तक अपात्र राशनकार्डों को डेटाबेस से निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी।
नगर निगम के जोन 1 से 8 तक संबंधित वार्डों के राजस्व निरीक्षकों और जोन के राशनकार्ड प्रभारियों को सत्यापन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस अभियान का उद्देश्य संदिग्ध, अपात्र और डुप्लीकेट राशनकार्डों की पहचान कर राशनकार्ड डेटाबेस को दुरुस्त करना है।
मिथिला हिन्दी न्यूज | संपादक: रोहित कुमार सोनू
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