नई दिल्ली। स्मार्टफोन यूजर्स के लिए स्क्रीन गार्ड और टेम्पर्ड ग्लास को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा नियामकीय बदलाव किया है। सरकार ने स्मार्टफोन स्क्रीन प्रोटेक्टर को अनिवार्य BIS व्यवस्था के दायरे में शामिल कर दिया है। यह नया नियम 1 अप्रैल 2027 से लागू होगा।
BIS की आधिकारिक सूची के मुताबिक स्मार्टफोन के स्क्रीन प्रोटेक्टर को IS 19348:2025 ‘Glass Screen Protector – Specification’ के तहत लाया गया है। यह व्यवस्था स्मार्टफोन के लिए इस्तेमाल होने वाले ग्लास स्क्रीन प्रोटेक्टर की गुणवत्ता से जुड़ी है।
नए नियम के तहत निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरने वाले स्क्रीन प्रोटेक्टर को नियम लागू होने के बाद भारत में बनाने, आयात करने, बिक्री के लिए रखने, बेचने या वितरित करने की अनुमति नहीं होगी। मानकों में ग्लास की गुणवत्ता, मजबूती, आकार, मोटाई, प्रकाश पारगम्यता और अन्य तकनीकी पहलू शामिल हैं।
इसका सीधा असर बाजार में मिलने वाले बेहद सस्ते और बिना किसी गुणवत्ता मानक वाले स्क्रीन गार्ड पर पड़ सकता है। हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि ₹50 या ₹100 के हर स्क्रीन गार्ड पर सीधे प्रतिबंध लग जाएगा। असल मुद्दा उसकी कीमत नहीं, बल्कि यह है कि वह निर्धारित BIS मानकों और पंजीकरण की आवश्यकताओं को पूरा करता है या नहीं। सरकार की अधिसूचना में खुदरा कीमत बढ़ाने का कोई निश्चित प्रतिशत भी घोषित नहीं किया गया है।
नए नियमों के कारण स्क्रीन प्रोटेक्टर बनाने वाली कंपनियों और आयातकों को परीक्षण तथा BIS अनुपालन की प्रक्रिया से गुजरना होगा। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि इससे बाजार में गुणवत्ता मानकों को बढ़ावा मिल सकता है, जबकि अनुपालन की अतिरिक्त लागत का असर उत्पाद की कीमत पर पड़ने की संभावना है। हालांकि, कीमत 10 से 20 प्रतिशत बढ़ेगी, यह सरकार द्वारा तय या घोषित आंकड़ा नहीं है।
BIS ने अपनी आगामी अनिवार्य मानकों की सूची में भी IS 19348:2025 – Glass Screen Protector – Specification को 1 अप्रैल 2027 से लागू होने वाले प्रावधान के रूप में दर्ज किया है। इसका मतलब है कि दुकानदारों और ग्राहकों के लिए फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नए नियम की तारीख और उसके बाद लागू होने वाली BIS अनुपालन व्यवस्था को समझें।
मिथिला हिन्दी न्यूज | रोहित कुमार सोनू