पटना में अपराध की एक और गंभीर घटना ने कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। बुद्धा कॉलोनी थाना क्षेत्र के किदवईपुरी इलाके में बुधवार शाम जन सुराज पार्टी से जुड़े नेता और वार्ड संख्या 24 के पूर्व पार्षद अनिल कुमार यादव पर अपराधियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। गंभीर रूप से घायल अनिल यादव को तत्काल बोरिंग रोड स्थित उदयन अस्पताल ले जाया गया, जहां से उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए आगे इलाज के लिए मेदांता अस्पताल रेफर किया गया। बाद की रिपोर्टों में इलाज के दौरान उनकी मौत की जानकारी सामने आई है।
जानकारी के मुताबिक अनिल यादव अपने अपार्टमेंट के बेसमेंट स्थित पार्किंग/कार्यालय परिसर में बैठे थे। इसी दौरान बाइक सवार हमलावर वहां पहुंचे और कुछ ही सेकंड में उन पर कई राउंड फायरिंग कर दी। पुलिस के अनुसार उन्हें करीब चार से पांच गोलियां लगीं। घटना के बाद हमलावर मौके से फरार हो गए। सामने आए सीसीटीवी फुटेज में भी हमलावरों के बाइक से पहुंचने और अनिल यादव पर फायरिंग करने की बात रिपोर्ट की गई है।
गोलियों की आवाज सुनकर आसपास के लोग और परिजन मौके पर पहुंचे और घायल अनिल यादव को अस्पताल पहुंचाया। घटना की सूचना मिलते ही बुद्धा कॉलोनी थाना पुलिस के साथ वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने घटनास्थल से आठ खोखे बरामद किए हैं और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की जा रही है। पुलिस हमलावरों की पहचान और घटना के पीछे की वजह का पता लगाने के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है। शुरुआती जांच में पुलिस विभिन्न पहलुओं और संभावित पुरानी रंजिश समेत अन्य कारणों को ध्यान में रखकर जांच कर रही है।
अनिल यादव पटना नगर निगम के वार्ड संख्या 24 के पूर्व पार्षद रह चुके थे और उनकी पत्नी वर्तमान में वार्ड 24 की पार्षद हैं। वह जन सुराज पार्टी से भी जुड़े हुए थे। घटना की जानकारी मिलने के बाद जन सुराज के संस्थापक और बांकीपुर के विधायक प्रशांत किशोर उदयन अस्पताल पहुंचे और अनिल यादव की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने परिजनों से मुलाकात भी की। बाद में अन्य राजनीतिक नेताओं के भी अस्पताल पहुंचने की जानकारी सामने आई।
इस घटना ने पटना में आम लोगों की सुरक्षा और अपराध पर नियंत्रण को लेकर फिर बहस तेज कर दी है। राजधानी के रिहायशी इलाके में अपार्टमेंट परिसर के भीतर इस तरह गोलीबारी होना अपने आप में गंभीर घटना है। लोगों के बीच यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर अपराधियों को हथियार लेकर इस तरह वारदात करने का साहस कैसे मिल रहा है और पुलिस की मौजूदगी तथा निगरानी व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए।
हाल के दिनों में बिहार में गोलीबारी की कई घटनाओं ने कानून-व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस को भी तेज किया है। इस घटना के बाद सरकार और पुलिस प्रशासन से अपराधियों की जल्द पहचान कर गिरफ्तारी तथा वारदात के पीछे के वास्तविक कारणों को सामने लाने की मांग उठ रही है। हालांकि घटना के पीछे राजनीतिक कारण, व्यक्तिगत रंजिश या कोई अन्य वजह है, यह पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पुलिसिंग, निगरानी, सीसीटीवी नेटवर्क, त्वरित कार्रवाई और अवैध हथियारों पर नियंत्रण को कितना प्रभावी बनाया जा रहा है। आम नागरिक को अपने घर, मोहल्ले और शहर में सुरक्षित माहौल चाहिए। पटना की इस घटना ने एक बार फिर इसी बुनियादी सवाल को सामने ला दिया है कि कानून का डर अपराधियों में कैसे मजबूत किया जाए और आम लोगों के भरोसे को कैसे कायम रखा जाए।
मिथिला हिन्दी न्यूज | रोहित कुमार सोनू
संपादक: रोहित कुमार सोनू