मिथिला हिन्दी न्यूज | रोहित कुमार सोनू
बिहार की राजनीति में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जनता दल यूनाइटेड को लेकर एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। राज्यसभा सांसद और कांग्रेस नेता अखिलेश प्रसाद सिंह ने हाल ही में नीतीश कुमार को महागठबंधन के साथ आने की अपील की। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार की समाजवादी विचारधारा रही है और उनका स्वाभाविक गठबंधन महागठबंधन के साथ होना चाहिए। अखिलेश प्रसाद सिंह की इस टिप्पणी के बाद बिहार की सियासत में संभावित राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
अखिलेश प्रसाद सिंह ने दावा किया कि एनडीए में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता और अन्य मुद्दों पर जेडीयू तथा भाजपा के बीच मतभेद सामने आ रहे हैं और ऐसी परिस्थितियों में नीतीश कुमार के लिए एनडीए में असहजता बढ़ सकती है। इसी संदर्भ में उन्होंने नीतीश कुमार से महागठबंधन में वापस आने की अपील की।
यह बयान ऐसे समय आया है जब इससे पहले राजद की ओर से भी नीतीश कुमार को एनडीए छोड़कर महागठबंधन के साथ आने का न्योता दिया गया था। राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने सितंबर में नीतीश कुमार से भाजपा का साथ छोड़कर समाजवादी दलों के साथ आने की अपील की थी। इसके बाद कांग्रेस नेता अखिलेश प्रसाद सिंह के बयान ने इस राजनीतिक चर्चा को और हवा दे दी।
हालांकि, कांग्रेस के भीतर इस मुद्दे पर एकराय नजर नहीं आ रही है। कांग्रेस प्रवक्ता असित नाथ तिवारी ने अखिलेश प्रसाद सिंह के बयान से खुद को अलग करते हुए कहा कि कांग्रेस की ओर से जेडीयू को सरकार बनाने का कोई आधिकारिक ऑफर नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी नीतीश कुमार के साथ सरकार बनाने के लिए दरवाजा खोलकर नहीं बैठी है।
इस घटनाक्रम ने बिहार कांग्रेस के भीतर अलग-अलग राजनीतिक रुख को लेकर चर्चा जरूर बढ़ा दी है। एक तरफ अखिलेश प्रसाद सिंह नीतीश कुमार को महागठबंधन के साथ आने की बात कह रहे हैं, वहीं पार्टी के अन्य नेताओं की ओर से इसे आधिकारिक कांग्रेस लाइन नहीं बताया जा रहा है। ऐसे में यह स्पष्ट है कि फिलहाल अखिलेश प्रसाद सिंह का बयान एक राजनीतिक अपील के रूप में सामने आया है, न कि कांग्रेस की ओर से घोषित गठबंधन निर्णय के रूप में।
वहीं, बिहार में भाजपा-जेडीयू गठबंधन को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं चल रही हैं। समान नागरिक संहिता को लेकर जेडीयू ने कहा है कि वह प्रस्तावित प्रावधानों को देखने के बाद अपना रुख तय करेगा। इसी बीच भाजपा और जेडीयू के बीच वैचारिक मुद्दों पर मतभेद की चर्चाओं ने विपक्षी दलों को राजनीतिक संभावनाएं तलाशने का मौका दिया है।
फिलहाल नीतीश कुमार या जेडीयू की ओर से अखिलेश प्रसाद सिंह के इस प्रस्ताव को स्वीकार करने का कोई निर्णय सामने नहीं आया है। इसलिए महागठबंधन की सरकार बनने या एनडीए में किसी तत्काल टूट की बात अभी राजनीतिक अटकलों के स्तर पर ही है। आने वाले दिनों में जेडीयू और कांग्रेस के आधिकारिक बयानों से इस पूरे घटनाक्रम की दिशा और स्पष्ट हो सकती है।
मिथिला हिन्दी न्यूज | संपादक: रोहित कुमार सोनू