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बिहार के अनुदानित कॉलेजों में बायोमेट्रिक हाजिरी अनिवार्य, नहीं लगाने पर वेतन अनुदान पर लग सकती है रोक
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September 15, 2026
मिथिला हिन्दी न्यूज | संपादक: रोहित कुमार सोनू
पटना। बिहार के अनुदानित इंटरमीडिएट और संबद्ध डिग्री कॉलेजों में शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए अब बायोमेट्रिक हाजिरी अनिवार्य कर दी गई है। उच्च शिक्षा विभाग ने स्पष्ट संकेत दिया है कि बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज नहीं करने वाले शिक्षकों और कर्मियों के वेतन की अनुदान राशि पर रोक लगाई जा सकती है। कार्रवाई से पहले विभाग ने राज्य के 235 संबंधित कॉलेजों से बायोमेट्रिक उपस्थिति से जुड़ी रिपोर्ट मांगी है।
अब कॉलेजों में सिर्फ हाजिरी रजिस्टर में उपस्थिति दर्ज करना पर्याप्त नहीं होगा। विभाग यह सुनिश्चित करना चाहता है कि शिक्षक और कर्मचारी नियमित रूप से बायोमेट्रिक सिस्टम के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज करें। इसके लिए कॉलेजों के प्राचार्यों को बायोमेट्रिक उपस्थिति से संबंधित रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। रिपोर्ट मिलने के बाद जिन कॉलेजों या शिक्षक-कर्मियों के स्तर पर लापरवाही सामने आएगी, उनके खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई की जा सकती है।
जानकारी के अनुसार, उच्च शिक्षा विभाग ने इसी साल मई में अनुदानित कॉलेजों में शिक्षकों और कर्मचारियों के बीच अनुदान राशि के वितरण को बायोमेट्रिक उपस्थिति से जोड़ने का आदेश दिया था। यह व्यवस्था मौजूदा शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू की गई है। विभाग का उद्देश्य शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों और कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना है।
कॉलेजों के अलावा परीक्षा परिणाम के आधार पर अनुदान प्राप्त करने वाले माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में भी शिक्षकों और कर्मचारियों के बीच अनुदान राशि के वितरण के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति को आधार बनाया गया है। विभाग ने स्कूलों में अनुदान राशि के वितरण के लिए कर्मचारियों को चार श्रेणियों में बांटा है।
पहली श्रेणी में प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक, दूसरी श्रेणी में शिक्षक और व्याख्याता, तीसरी श्रेणी में प्रयोगशाला तकनीशियन, कंप्यूटर सहायक, पुस्तकालयाध्यक्ष और कार्यालय सहायक तथा चौथी श्रेणी में केयरटेकर और ऑफिस अटेंडेंट को रखा गया है। निर्धारित व्यवस्था के अनुसार सबसे अधिक अनुदान राशि प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक को मिलेगी। इसके बाद शिक्षक और व्याख्याता की श्रेणी होगी।
अब 235 कॉलेजों से मांगी गई रिपोर्ट के आधार पर विभाग यह जांच करेगा कि किन संस्थानों में बायोमेट्रिक उपस्थिति की व्यवस्था का सही तरीके से पालन किया जा रहा है और किन जगहों पर शिक्षक एवं कर्मचारी इसका पालन नहीं कर रहे हैं। रिपोर्ट में लापरवाही सामने आने पर संबंधित संस्थान और कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है तथा वेतन मद की अनुदान राशि पर रोक लगाने का फैसला भी लिया जा सकता है।
मिथिला हिन्दी न्यूज | रोहित कुमार सोनू
