विक्रमशिला सेतु बंद होने से टोल कलेक्शन में भारी गिरावट, बेली ब्रिज हटाने की तैयारी तेज


विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद 3 मई से इसके बंद रहने का असर यातायात के साथ-साथ एनएचएआई के टोल कलेक्शन पर भी पड़ा है। सेतु बंद होने के बाद बायपास टोल प्लाजा के कलेक्शन में पहले की तुलना में 79.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गयी है। वहीं, बाढ़ आने के बाद टोल कलेक्शन में 38.46 प्रतिशत की अतिरिक्त गिरावट हुई है। स्थिति को देखते हुए एनएचएआई ने टोल एजेंसी से ली जाने वाली दैनिक राशि को करीब 6.25 लाख रुपये से घटाकर 1.30 लाख रुपये कर दिया है। इसके बावजूद एजेंसी को प्रतिदिन करीब 80 हजार रुपये तक का ही टोल कलेक्शन प्राप्त हो रहा है।

मुंबई की एसएस मल्टीसर्विस एजेंसी नवंबर तक टोल वसूली का काम करेगी। मई में एजेंसी ने भारी नुकसान का हवाला देते हुए ठेका सरेंडर करने का प्रस्ताव भी दिया था। परियोजना निदेशक के अनुसार विक्रमशिला सेतु के बंद होने और बाढ़, दोनों का टोल कलेक्शन पर सीधा असर पड़ा है।

इधर, विक्रमशिला सेतु के पुनर्स्थापन की दिशा में बेली ब्रिज को हटाना एक महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है। सेतु बंद होने के बाद निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने की तैयारी है। हालांकि इस दौरान यातायात प्रबंधन और लोगों के लिए वैकल्पिक आवागमन की व्यवस्था प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती होगी।

सेतु बंद रहने के दौरान गंगा के रास्ते आवागमन के लिए यात्री और मालवाहक जहाजों की व्यवस्था की जा रही है। अब तक सात यात्री जहाजों के संचालन के लिए आवेदन प्राप्त हो चुके हैं, जबकि मालवाहक जहाजों के लिए आवेदन की प्रक्रिया जारी है। जिला प्रशासन के स्तर पर 20 सितंबर के बाद बैठक आयोजित की जायेगी। इसी बैठक में सेतु बंद करने तथा वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर प्रशासन अपनी अंतिम स्थिति स्पष्ट करेगा।

बाबूपुर और हाई लेवल घाट पर ओवरलोड वाहनों के खिलाफ विशेष अभियान चलाने की भी तैयारी है। मालवाहक जहाज संचालकों को प्रत्येक ट्रक के लोडिंग बिल की जांच करने का निर्देश दिया जायेगा। ओवरलोड पाए जाने पर संबंधित वाहन को गंगा पार नहीं कराया जायेगा।

यात्री और मालवाहक जहाजों के संचालन के दौरान सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किये जायेंगे। इसके लिए गोताखोर, लाइफ जैकेट और सुरक्षा बलों की तैनाती की जायेगी। त्योहारों के दौरान बढ़ने वाली आवाजाही को देखते हुए नदी के रास्ते आवागमन को सुरक्षित बनाने पर विशेष ध्यान दिया जायेगा।

जिला प्रशासन और निर्माण एजेंसियों की ओर से बेली ब्रिज हटाने की तैयारी तेज कर दी गयी है। गंगा के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन का कहना है कि परिस्थितियां अनुकूल रहने पर निर्धारित समय के अनुसार निर्माण कार्य शुरू किया जायेगा।

सेतु बंद रहने के दौरान आम लोगों और माल परिवहन को कम से कम परेशानी हो, इसके लिए त्योहारों से पहले वैकल्पिक आवागमन की व्यवस्था तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। प्रशासन के सामने अब एक ओर सेतु के पुनर्स्थापन कार्य को आगे बढ़ाने की चुनौती है, तो दूसरी ओर लोगों और कारोबारियों के लिए सुरक्षित एवं सुचारु वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित करना भी अहम होगा।

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