सितंबर में मोदी कैबिनेट में फेरबदल की चर्चा तेज, बिहार के कई मंत्रियों पर टिकी निगाहें; संजय झा से लेकर विवेक ठाकुर और मनन मिश्रा तक के नाम चर्चा में


नई दिल्ली/पटना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में सितंबर 2026 में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। खासकर बिहार को लेकर कई तरह के नए समीकरण सामने आ रहे हैं। चर्चा है कि इस बार केंद्र सरकार में युवा और महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने के साथ-साथ आगामी राजनीतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए जातीय समीकरण साधने की कोशिश भी की जा सकती है। हालांकि अंतिम फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को ही करना है।

पिछले दिनों पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात के दौरान जनता दल यूनाइटेड (JDU) के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा को केंद्र में मंत्री बनाए जाने के मुद्दे पर भी चर्चा होने की बात कही जा रही है। ऐसे में सबकी नजर संभावित सितंबर कैबिनेट विस्तार पर टिकी है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि फेरबदल होता है तो बिहार से किन पुराने चेहरों को हटाया जाएगा, किन नेताओं को नई जिम्मेदारी मिलेगी और किन नए चेहरों की केंद्र सरकार में एंट्री होगी।

JDU के स्तर पर सबसे महत्वपूर्ण चर्चा संजय झा को लेकर है। राजनीतिक गलियारों में कहा जा रहा है कि यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी JDU को केंद्र में दो मंत्री पद देने पर सहमत होते हैं तो राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह की स्थिति फिलहाल सुरक्षित रह सकती है और संजय झा को अतिरिक्त मंत्री पद मिल सकता है। वहीं यदि JDU को सिर्फ एक मंत्री पद मिलता है, तो ऐसी स्थिति में ललन सिंह की जगह संजय झा को केंद्र में लाए जाने की संभावना पर चर्चा हो रही है। हालांकि यह फिलहाल राजनीतिक अटकलों तक ही सीमित है।

बिहार भाजपा में भी संभावित बदलाव को लेकर कई नाम चर्चा में हैं। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह और केंद्रीय राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे को लेकर बदलाव की अटकलें लगाई जा रही हैं। गिरिराज सिंह की उम्र को देखते हुए यदि भाजपा केंद्रीय मंत्रिमंडल में युवा चेहरों को आगे बढ़ाने का फैसला करती है, तो नवादा के राज्यसभा सांसद विवेक ठाकुर को मौका मिलने की संभावना जताई जा रही है। वहीं सतीश चंद्र दुबे की जगह राज्यसभा सांसद मनन मिश्रा को केंद्र में जिम्मेदारी दिए जाने की चर्चा है।

सतीश चंद्र दुबे को 9 जून 2024 को मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में केंद्रीय राज्य मंत्री बनाया गया था। वर्तमान में उनके पास कोयला और खान मंत्रालय की जिम्मेदारी है। उनके कामकाज को लेकर राजनीतिक स्तर पर कुछ नकारात्मक चर्चाएं जरूर सामने आती रही हैं, हालांकि केंद्रीय नेतृत्व की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है। ऐसे में मनन मिश्रा के नाम की चर्चा को फिलहाल संभावित राजनीतिक समीकरण के तौर पर ही देखा जा रहा है।

उम्र के लिहाज से बिहार से संभावित बदलाव की चर्चा में सबसे प्रमुख नाम गिरिराज सिंह का है। गिरिराज सिंह भाजपा के चर्चित और मुखर नेताओं में शामिल हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पहली बार 9 नवंबर 2014 को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में जिम्मेदारी संभाली थी। इसके बाद 2019 और 2024 में उन्हें मोदी मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री बनाया गया। यदि भाजपा युवा नेतृत्व को प्राथमिकता देने का फैसला करती है तो गिरिराज सिंह की जगह विवेक ठाकुर को मौका दिए जाने की चर्चा जोर पकड़ सकती है।

बिहार में भाजपा की युवा राजनीति को लेकर भी पिछले कुछ समय से जोर दिया जा रहा है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में नितिन नवीन के आने के बाद राज्य में युवा नेतृत्व को लेकर पार्टी की सक्रियता चर्चा में है। इसका असर केंद्र में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार में भी देखने को मिल सकता है। हालांकि बिहार में तत्काल कोई विधानसभा चुनाव नहीं होने के कारण राज्य के मौजूदा मंत्रियों में बड़े पैमाने पर बदलाव की संभावना को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों की राय अलग-अलग है।

फिलहाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में बिहार से कुल आठ मंत्री हैं। इनमें चार कैबिनेट मंत्री और चार राज्य मंत्री शामिल हैं। कैबिनेट मंत्रियों में गिरिराज सिंह के पास कपड़ा मंत्रालय, चिराग पासवान के पास खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह के पास पंचायती राज के साथ मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय तथा जीतन राम मांझी के पास सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय है।

वहीं राज्य मंत्रियों में नित्यानंद राय गृह मंत्रालय, सतीश चंद्र दुबे कोयला एवं खान मंत्रालय, रामनाथ ठाकुर कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय तथा राज भूषण चौधरी जल शक्ति मंत्रालय में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। राज भूषण चौधरी को लेकर भी संभावित बदलाव की चर्चा है। उनके कामकाज को लेकर सवाल उठने की बात कही जा रही है, हालांकि उनकी जगह किसे लाया जाएगा, इसे लेकर अभी कोई स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं आई है।

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक संभावित फेरबदल केवल मंत्रियों के प्रदर्शन या उम्र तक सीमित नहीं हो सकता। इसमें युवा नेतृत्व, महिला प्रतिनिधित्व और जातीय समीकरण भी अहम भूमिका निभा सकते हैं। खासकर उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा की केंद्रीय रणनीति का असर बिहार के राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है। उत्तर प्रदेश की जातीय राजनीति का प्रभाव बिहार में भी महसूस किया जाता है, इसलिए मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व तय करते समय पार्टी इन समीकरणों को नजरअंदाज नहीं करेगी।

बिहार के लिए इस संभावित फेरबदल में एक तरफ पुराने और अनुभवी चेहरों को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं, तो दूसरी तरफ कई नए नेताओं की उम्मीदें बढ़ गई हैं। संजय झा, विवेक ठाकुर और मनन मिश्रा जैसे नामों की चर्चा ने बिहार की राजनीति में उत्सुकता बढ़ा दी है। लेकिन अभी तक मंत्रिमंडल विस्तार या किसी मंत्री को हटाने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

फिलहाल दिल्ली की राजनीतिक दौड़ शुरू हो चुकी है। भाजपा और सहयोगी दलों के नेताओं की गतिविधियों पर निगाहें टिकी हैं। कौन दिल्ली में अपनी जगह बचाता है, किसे नई जिम्मेदारी मिलती है और किस नए चेहरे के लिए केंद्र का दरवाजा खुलता है—इसका फैसला आने वाले दिनों में होगा। फिलहाल इतना जरूर है कि सितंबर का संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल बिहार की राजनीति में कई नए समीकरणों को जन्म दे सकता है।

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