नई दिल्ली। 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से अधिक के कुछ UPI मर्चेंट भुगतान पर Merchant Discount Rate (MDR) लागू होने को लेकर बहस तेज हो गई है। इसी बीच नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी का बयान चर्चा में है। उन्होंने कहा कि डिजिटल पेमेंट व्यवस्था को लंबे समय तक केवल सरकारी सब्सिडी के सहारे चलाना उचित नहीं है और इसे आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने की जरूरत है।
अशोक कुमार लाहिड़ी ने बड़े UPI लेन-देन पर प्रस्तावित शुल्क का उदाहरण देते हुए कहा कि 100 रुपये के लेन-देन पर 40 पैसे का शुल्क लगता है तो इससे कारोबार पर बड़ा असर नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने सवालिया अंदाज में कहा, “100 रुपये के ट्रांजैक्शन पर 40 पैसे देने होंगे, क्या इससे आपकी जान निकल जाएगी?” उनका तर्क था कि डिजिटल पेमेंट सिस्टम को चलाने और विकसित करने के लिए उससे जुड़े कारोबार को भी आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाना जरूरी है।
नए ढांचे के अनुसार 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से अधिक के पात्र Person-to-Merchant (P2M) UPI भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। उदाहरण के तौर पर 10,000 रुपये के ऐसे भुगतान पर 40 रुपये MDR बनता है। यह शुल्क मर्चेंट यानी भुगतान प्राप्त करने वाले कारोबारी पर लागू होगा। 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेन-देन पर MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपये रखी गई है।
हालांकि, सभी UPI लेन-देन पर यह शुल्क लागू नहीं होगा। 2,000 रुपये तक के P2M भुगतान और व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P भुगतान को शुल्क से बाहर रखा गया है। छोटे मर्चेंट, जिन्हें UPI QR के जरिए महीने में 1 लाख रुपये तक प्राप्त होते हैं, उनके लिए भी शून्य-MDR व्यवस्था जारी रहने की जानकारी दी गई है।
कुछ विशेष क्षेत्रों के लिए अलग शुल्क व्यवस्था है। रेलवे, ईंधन, टेलीकॉम, बीमा और कुछ अन्य निर्धारित श्रेणियों में 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर 5 रुपये का फ्लैट MDR लागू होने की जानकारी सामने आई है। वहीं कुछ पूंजी बाजार संबंधी भुगतान पर अलग दर निर्धारित की गई है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि MDR को सीधे ग्राहक से वसूलने की अनुमति नहीं है। वित्त मंत्रालय ने बैंकों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि मर्चेंट इस शुल्क का बोझ UPI ग्राहक पर न डालें।
अशोक कुमार लाहिड़ी ने यह भी स्पष्ट किया कि सब्सिडी के भरोसे किसी डिजिटल पेमेंट व्यवस्था को हमेशा चलाना संभव नहीं है। उन्होंने UPI को भविष्य में वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाने की जरूरत पर जोर दिया। साथ ही, उन्होंने स्पष्ट किया कि MDR को लेकर उनके विचार उनकी व्यक्तिगत राय हैं और इन्हें नीति आयोग का आधिकारिक रुख नहीं माना जाना चाहिए।
मिथिला हिन्दी न्यूज | रोहित कुमार सोनू
संपादक: रोहित कुमार सोनू