मिथिला हिन्दी न्यूज | संपादक: रोहित कुमार सोनू
वैशाली: बिहार के ऐतिहासिक वैशाली जिले में 11 से 13 दिसंबर 2026 तक अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। तीन दिवसीय इस महत्वपूर्ण आयोजन में देश-विदेश के बौद्ध भिक्षु, आध्यात्मिक गुरु और विद्वान शामिल होंगे। सम्मेलन का आयोजन बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय-सह-स्मारक स्तूप परिसर में किया जाएगा। इस आयोजन के माध्यम से वैशाली की समृद्ध बौद्ध विरासत, ऐतिहासिक महत्व और सांस्कृतिक पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की तैयारी की जा रही है।
वैशाली की जिलाधिकारी वर्षा सिंह ने बताया कि सम्मेलन में विभिन्न देशों से बौद्ध धर्म के अनुयायी, धर्मगुरु और विद्वान भाग लेंगे। जिला प्रशासन का उद्देश्य देश-विदेश से आने वाले अतिथियों और श्रद्धालुओं को वैशाली की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना है। इसके लिए आयोजन स्थल पर आवश्यक व्यवस्थाओं के साथ विभिन्न कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जा रही है।
कैबिनेट सचिवालय विभाग के अनुसार, सम्मेलन में म्यांमा, थाईलैंड, लाओस, जापान और दक्षिण कोरिया समेत कई देशों के बौद्ध भिक्षुओं एवं आध्यात्मिक नेताओं के शामिल होने की संभावना है। अब तक 14 अंतरराष्ट्रीय विद्वानों ने सम्मेलन में भाग लेने की पुष्टि की है। विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों की भागीदारी से बिहार की बौद्ध परंपरा और वैश्विक बौद्ध समुदाय के बीच संवाद को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
तीन दिनों तक चलने वाले इस सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें त्रिपिटक पाठ, बौद्ध विरासत पर विचार-विमर्श, हेरिटेज वॉक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां प्रमुख आकर्षण होंगी। इसके साथ ही बिहार के पारंपरिक हस्तशिल्प को प्रदर्शित करने के लिए एक विशाल प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। इस प्रदर्शनी के माध्यम से राज्य की कला, शिल्प और पारंपरिक कारीगरी को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।
वैशाली का बौद्ध धर्म के इतिहास में विशेष स्थान है। भगवान बुद्ध के जीवन और उनकी शिक्षाओं से जुड़ी इस ऐतिहासिक भूमि को बौद्ध अनुयायी श्रद्धा की दृष्टि से देखते हैं। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन का आयोजन वैशाली की ऐतिहासिक पहचान को व्यापक स्तर पर सामने लाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जिला प्रशासन की कोशिश है कि सम्मेलन में भाग लेने वाले विदेशी अतिथियों और श्रद्धालुओं को वैशाली की विरासत का बेहतर अनुभव मिले। इसके साथ ही आयोजन के जरिए धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहन देने, स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देने और बिहार की ऐतिहासिक धरोहर को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने पर भी जोर रहेगा।
बिहार के हस्तशिल्प, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और बौद्ध परंपराओं को एक ही मंच पर प्रदर्शित करने वाला यह आयोजन वैशाली के लिए महत्वपूर्ण अवसर होगा। दिसंबर में होने वाले इस सम्मेलन से जिले की अंतरराष्ट्रीय पहचान, पर्यटन गतिविधियों और स्थानीय विरासत के प्रचार-प्रसार को नई गति मिलने की उम्मीद है।
मिथिला हिन्दी न्यूज | संपादक: रोहित कुमार सोनू