👁️ अब तक पढ़ा गया:
बार
बिहार में नशे के खिलाफ बड़ा संकल्प, पकड़े जाने पर 25 हजार रुपये जुर्माने का फैसला
0
October 18, 2026
मिथिला हिन्दी न्यूज | संपादक: रोहित कुमार सोनू
मधेपुरा, बिहार। बिहार के मधेपुरा जिले में नशे के खिलाफ ग्रामीणों ने सामूहिक अभियान चलाने का संकल्प लिया है। सदर प्रखंड की सहुगढ़ पंचायत में आयोजित बैठक में ग्रामीणों ने गांव को नशामुक्त बनाने के लिए कई अहम निर्णय लिए। बैठक में तय किया गया कि नशे का सेवन करते या नशीले पदार्थों की बिक्री करते पकड़े जाने वाले व्यक्ति पर 25 हजार रुपये का सामाजिक जुर्माना लगाने का प्रावधान रखा जाएगा। इसके साथ ही संबंधित मामले की सूचना प्रशासन को देकर कानूनी कार्रवाई की मांग की जाएगी।
यह निर्णय 17 अक्टूबर को सहुगढ़ पंचायत के स्कूल परिसर में आयोजित बैठक के दौरान लिया गया। बैठक की अध्यक्षता मुखिया मुकेश कुमार ने की। इसमें वर्तमान और पूर्व मुखिया, पंचायत प्रतिनिधियों तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया। सभी लोगों ने मिलकर गांव में नशे के सेवन और नशीले पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाने के लिए सामूहिक प्रयास करने का संकल्प लिया।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि यदि नशे से जुड़े किसी मामले में कोई व्यक्ति जेल जाता है, तो उसके परिजन उसकी जमानत कराने के लिए आगे नहीं आएंगे। ग्रामीणों का मानना है कि ऐसे फैसलों से लोगों पर सामाजिक दबाव बनेगा और वे नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित होंगे।
इस बैठक में भाजपा के मधेपुरा जिलाध्यक्ष दीपक कुमार भी शामिल हुए। उन्होंने बताया कि दोनों पंचायतों के लोग एकजुट होकर नशे के सेवन और बिक्री पर रोक लगाने के लिए आगे आए हैं। बैठक में ग्रामीणों और पंचों ने लिखित संकल्प पत्र भी तैयार किया, जिस पर उपस्थित लोगों ने हस्ताक्षर किए।
बैठक की अध्यक्षता कर रहे मुखिया मुकेश कुमार ने कहा कि पंचायत को नशामुक्त बनाना किसी एक व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए सभी ग्रामीणों को अपनी भूमिका निभानी होगी। उन्होंने सामूहिक भागीदारी के माध्यम से गांव में नशे के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने और इसकी बिक्री रोकने पर जोर दिया।
ग्रामीणों का कहना है कि केवल बैठक करने से नशे की समस्या समाप्त नहीं होगी, बल्कि इसके लिए लगातार अभियान चलाना जरूरी है। उनका उद्देश्य युवाओं को नशे से बचाना, परिवारों को इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना और गांव में नशीले पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाने में प्रशासन का सहयोग करना है।
हालांकि, 25 हजार रुपये के सामाजिक जुर्माने और जमानत नहीं कराने जैसे निर्णयों की कानूनी स्थिति अलग विषय है। किसी व्यक्ति पर जुर्माना लगाने या उसके कानूनी अधिकारों को प्रभावित करने वाली कार्रवाई कानून के अनुरूप ही की जा सकती है। जेल जाने वाले व्यक्ति की जमानत का फैसला भी संबंधित कानूनी प्रक्रिया के तहत होता है।
फिलहाल सहुगढ़ पंचायत के ग्रामीणों ने नशे के खिलाफ एकजुट होकर अभियान चलाने का संकल्प लिया है। अब इस पहल का असर गांव में नशे के सेवन और नशीले पदार्थों की बिक्री पर कितना पड़ता है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
मिथिला हिन्दी न्यूज | संपादक: रोहित कुमार सोनू
