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सहरसा के बाबा कारू खिरहर धाम में आस्था का महासागर, लाखों श्रद्धालुओं ने किया दुग्धाभिषेक; कोसी नदी में बही दूध की धारा
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October 18, 2026
मिथिला हिन्दी न्यूज | संपादक: रोहित कुमार सोनू
सहरसा, बिहार। शारदीय नवरात्रि की महासप्तमी के अवसर पर बिहार के सहरसा जिले में आस्था और भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला। महिषी प्रखंड के महपुरा गांव में कोसी नदी के तट पर स्थित प्रसिद्ध संत बाबा कारू खिरहर धाम में लाखों श्रद्धालुओं ने पहुंचकर दुग्धाभिषेक किया। श्रद्धालुओं की ओर से इतनी बड़ी मात्रा में दूध अर्पित किया गया कि मंदिर परिसर से दूध की धारा बहने लगी और पीछे बह रही कोसी नदी में समाहित हो गई। दूध की धारा और कोसी नदी का यह दृश्य श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बना रहा और सोशल मीडिया पर भी इसकी खूब चर्चा हुई।
महासप्तमी की सुबह से ही बाबा कारू खिरहर धाम में श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। बिहार के कोसी, मिथिलांचल और सीमांचल क्षेत्रों के अलावा झारखंड, पश्चिम बंगाल और पड़ोसी देश नेपाल से भी बड़ी संख्या में भक्त बाबा के दर्शन और दुग्धाभिषेक के लिए पहुंचे। मंदिर परिसर में दिनभर धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-अर्चना और भक्ति गीतों का दौर चलता रहा।
17वीं शताब्दी से जुड़ी है बाबा कारू खिरहर की लोकगाथा
बाबा कारू खिरहर धाम का इतिहास स्थानीय लोक मान्यताओं और आस्था से जुड़ा हुआ है। प्रचलित लोकगाथाओं के अनुसार, 17वीं शताब्दी में महपुरा गांव के एक यादव परिवार में कुलदेवी मां दुर्गा की कृपा से बालक कारू का जन्म हुआ था। लोक परंपराओं में उन्हें भगवान श्रीकृष्ण के वंशज के रूप में भी याद किया जाता है।
मान्यता है कि बाबा कारू खिरहर का पूरा जीवन गौ-सेवा, पशुधन की रक्षा और भगवान शिव की भक्ति में बीता। उन्होंने कोसी दियारा क्षेत्र के दुर्गम जंगलों में रहने वाले लोगों और उनके पशुओं की हिंसक जानवरों तथा महामारियों से रक्षा की थी। इसी कारण पशुपालक समुदाय में उनके प्रति गहरी श्रद्धा है।
स्थानीय परंपरा के अनुसार, किसी पशुपालक की गाय या भैंस के बछड़े को जन्म देने के बाद उसका पहला दूध बाबा के दरबार में अर्पित किया जाता है। भक्तों का विश्वास है कि बाबा की भभूत लगाने से मनुष्य और पशुओं को रोगों से राहत मिलती है। हालांकि, इस तरह के धार्मिक विश्वासों को चिकित्सा संबंधी प्रमाणित उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
दूध के साथ लाठी, खड़ाऊं और पारंपरिक सामग्री भी चढ़ाई गई
बाबा कारू खिरहर धाम में दुग्धाभिषेक के साथ कई पारंपरिक वस्तुएं अर्पित करने की भी परंपरा है। स्थानीय ग्रामीण नंदन कुमार के अनुसार, श्रद्धालु बाबा को दूध के अलावा लाठी, खड़ाऊं, पीतल का झांप, दही, चूड़ा, अरवा चावल, फल और मिठाइयां चढ़ाते हैं।
महासप्तमी के अवसर पर मंदिर और आसपास के मेला परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। भक्ति संगीत और भगैत गायन से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
महाप्रसाद की खीर पाने के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
महासप्तमी के अवसर पर बाबा को अर्पित किए गए दूध से विशाल देगों और कड़ाहों में खीर तैयार की गई। दूध को घंटों तक पकाकर महाप्रसाद बनाया गया। इसके बाद श्रद्धालुओं के बीच खीर का वितरण किया गया। प्रसाद ग्रहण करने के लिए भक्तों में खासा उत्साह देखने को मिला।
स्थानीय मान्यता है कि बाबा कारू खिरहर के दरबार में पूजा-अर्चना करने और महाप्रसाद ग्रहण करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है तथा धन-धान्य की वृद्धि होती है। इसी आस्था के कारण हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
दान राशि के विवाद और गोलीबारी के बाद प्रशासन की व्यवस्था पर नजर
बाबा कारू खिरहर धाम में श्रद्धा और भक्ति के बीच मंदिर की दान राशि तथा न्यास समिति के वर्चस्व को लेकर हुए पुराने विवाद की चर्चा भी होती रही है। जानकारी के अनुसार, कुछ समय पहले निवर्तमान न्यासधारी निरंजन कुमार और दूसरे पक्ष के बीच विवाद के दौरान कई राउंड गोलीबारी हुई थी। इस घटना में ग्रामीणों के घायल होने और आक्रोशित लोगों की ओर से एक वाहन में आग लगाए जाने की भी खबर सामने आई थी।
घटना के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपित निरंजन कुमार सहित अन्य लोगों को अवैध हथियारों और कारतूस के साथ गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा था। इस घटना ने मंदिर की व्यवस्था और न्यास समिति के संचालन को लेकर कई सवाल खड़े किए थे।
हालांकि, महासप्तमी के अवसर पर बाबा कारू खिरहर धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। दूध से अभिषेक, पारंपरिक चढ़ावे, भगैत गायन और महाप्रसाद की खीर ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना दिया। कोसी नदी के तट पर स्थित यह धाम एक बार फिर अपनी धार्मिक परंपरा और लोक आस्था के कारण चर्चा में रहा।
मिथिला हिन्दी न्यूज | संपादक: रोहित कुमार सोनू
