पटना। बिहार में आठ सीटों पर होने वाले विधान परिषद चुनाव के प्रचार का शोर थमने के बाद अब सबकी नजर मतदान और उसके नतीजों पर है। मतदान से ठीक पहले राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। इसी बीच भाजपा कोटे के मंत्री और पाटलिपुत्र से पूर्व सांसद रामकृपाल यादव का जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर को लेकर दिया गया बयान चर्चा में है।
रामकृपाल यादव ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान प्रशांत किशोर और उनकी पार्टी के उम्मीदवारों को लेकर सवाल उठाते हुए उनकी राजनीतिक पहचान पर ही सवाल खड़ा कर दिया। उन्होंने जन सुराज के प्रत्याशियों को लेकर भी ऐसी टिप्पणी की, जिससे बिहार की सियासत में एक बार फिर प्रशांत किशोर बनाम स्थापित राजनीतिक दलों की बहस तेज हो गई है।
खास बात यह है कि रामकृपाल यादव का यह सवाल पहली बार सामने नहीं आया है। बांकीपुर उपचुनाव के दौरान भी उन्होंने प्रशांत किशोर की राजनीतिक जमीन और उनके प्रभाव को लेकर सवाल उठाया था। उस चुनाव का परिणाम क्या रहा, यह बिहार की राजनीति में किसी से छिपा नहीं है। अब एमएलसी चुनाव की वोटिंग से कुछ घंटे पहले रामकृपाल यादव ने एक बार फिर उसी राजनीतिक सवाल को सामने रख दिया है।
बताया जाता है कि प्रशांत किशोर और रामकृपाल यादव सरकारी आवास में पड़ोसी भी हैं। ऐसे में दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक दूरी के बावजूद उनके नाम एक बार फिर चुनावी चर्चा के केंद्र में आ गए हैं।
दरअसल, बिहार में आठ सीटों पर होने वाले विधान परिषद चुनाव को लेकर एनडीए और विपक्ष के बीच मुकाबला दिलचस्प बना हुआ है। जन सुराज पार्टी भी अपने प्रत्याशियों के साथ चुनावी मैदान में है और लगातार यह दावा करती रही है कि वह बिहार की पारंपरिक राजनीति का विकल्प बनने की कोशिश कर रही है। वहीं, भाजपा और एनडीए के नेता जन सुराज की राजनीतिक पकड़ और उसके उम्मीदवारों की चुनावी क्षमता पर सवाल उठाते रहे हैं।
अब सवाल यह है कि रामकृपाल यादव के तंज का जवाब चुनावी नतीजे देंगे या नहीं? क्या प्रशांत किशोर और जन सुराज अपने उम्मीदवारों के जरिए राजनीतिक प्रभाव साबित कर पाएंगे, या फिर एनडीए और अन्य प्रमुख दलों का दबदबा कायम रहेगा? इन तमाम सवालों का जवाब मतदान के बाद सामने आएगा।
आठ सीटों पर मतदान के बाद 27 अक्टूबर को मतगणना और परिणाम घोषित किए जाएंगे। इसके बाद साफ होगा कि इस चुनाव में किस दल और किस रणनीति को मतदाताओं का समर्थन मिला और प्रशांत किशोर की राजनीतिक प्रयोगशाला का असर जमीन पर कितना दिखाई दिया।
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