बिहार में दिल्ली-मुंबई की तर्ज पर बनेंगे विश्वस्तरीय बस टर्मिनल, मुजफ्फरपुर समेत 9 जिलों में निर्माण की तैयारी

बिहार में अब दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों की तर्ज पर आधुनिक और विश्वस्तरीय बस टर्मिनल विकसित करने की योजना धरातल पर उतरने जा रही है। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में नौ जिलों के बस डिपो के प्रस्तावित डिजाइन को मंजूरी दे दी गई है। डिजाइन स्वीकृत होने के बाद अब जल्द ही आरएफपी यानी रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल तैयार कर निर्माण प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी है। बिहार राज्य पथ परिवहन निगम के अनुसार, पहले चरण में मुजफ्फरपुर, गया, बिहारशरीफ, राजगीर, दरभंगा, पूर्णिया, मोतिहारी, तारापुर और मुंगेर में आधुनिक बस टर्मिनल विकसित किए जाएंगे। इन टर्मिनलों को केवल बसों के ठहराव और यात्रियों के आने-जाने तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इन्हें मल्टी-मॉडल हब के रूप में विकसित करने की योजना है। प्रस्तावित बस टर्मिनलों में यात्रियों को एयरपोर्ट जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की तैयारी है। यहां वातानुकूलित प्रतीक्षालय, डिजिटल डिस्प्ले सूचना प्रणाली, स्वच्छ पेयजल, आधुनिक शौचालय, पर्याप्त पार्किंग, यात्री सहायता केंद्र, सुरक्षा व्यवस्था, एटीएम, दीदी की रसोई और ई-वाहन चार्जिंग स्टेशन जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। दिव्यांग और वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी विशेष सुविधाओं का प्रावधान किया जाएगा। प्रस्तावित पांच मंजिला टर्मिनलों के ग्राउंड फ्लोर पर बस पार्किंग और वर्कशॉप की व्यवस्था होगी। ऊपरी मंजिलों पर निगम कार्यालय, कैफेटेरिया, दुकानें, एसी और नॉन-एसी वेटिंग रूम, बस चालकों और संवाहकों के लिए डॉर्मेटरी, गेस्ट रूम, महिला फीडिंग रूम, बैंक्वेट हॉल, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, होटल और मनोरंजन क्षेत्र विकसित किए जाने की योजना है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए बिहार के 31 महत्वपूर्ण शहरों को चिह्नित किया गया है। इनमें पटना, मुजफ्फरपुर, गया, भागलपुर, पूर्णिया, दरभंगा, मुंगेर, जमुई, नवादा, सहरसा, पालीगंज, लहेरियासराय, मधुबनी, किशनगंज, मोतिहारी, छपरा, सुल्तानगंज, नौबतपुर, बरबीघा, मोकामा, चकाई, सीतामढ़ी, बिहारशरीफ, औरंगाबाद, आरा, जहानाबाद, संग्रामपुर, तारापुर और राजगीर शामिल हैं। परियोजना के तहत जमीन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी बिहार राज्य पथ परिवहन निगम की होगी, जबकि बस टर्मिनलों के निर्माण और रखरखाव की जिम्मेदारी निजी भागीदार को दिए जाने की योजना है। इससे सरकार पर निर्माण और रखरखाव का पूरा वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा और निजी क्षेत्र की भागीदारी से आधुनिक सुविधाओं को विकसित करने में मदद मिलेगी। इन विश्वस्तरीय बस टर्मिनलों के विकसित होने से यात्रियों को लंबी दूरी की यात्रा के दौरान बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद है। साथ ही टर्मिनलों में दुकान, होटल, कैफेटेरिया, मनोरंजन और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां शुरू होने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं। बिहार में परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में यह परियोजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आने वाले समय में इन बस टर्मिनलों के निर्माण की प्रक्रिया शुरू होने के बाद यात्रियों को बस अड्डे के पारंपरिक स्वरूप की जगह एक आधुनिक परिवहन केंद्र का अनुभव मिलने की उम्मीद है। मिथिला हिन्दी न्यूज | रोहित कुमार सोनू संपादक: रोहित कुमार सोनू
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