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राजद में संगठनात्मक हलचल तेज, इस्तीफे के बावजूद अब्दुल बारी सिद्दीकी का निर्देश; भंग जिला और प्रखंड कमेटियों को दिल्ली बुलाया
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October 30, 2026
बिहार की सियासत में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के भीतर संगठनात्मक बदलाव को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव पद से इस्तीफा दे चुके अब्दुल बारी सिद्दीकी के एक नए निर्देश ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा बढ़ा दी है। उन्होंने प्रदेश की उन जिला और प्रखंड कमेटियों के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं को दिल्ली पहुंचने का निर्देश दिया है, जिन्हें करीब तीन महीने पहले भंग कर दिया गया था। खास बात यह है कि पुरानी कमेटियों को भंग किए जाने के बाद अब तक नई कमेटियों का गठन नहीं हो सका है। ऐसे में पार्टी के संगठनात्मक ढांचे और नेतृत्व की भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
दरअसल, राजद में पिछले कुछ समय से संगठन को नए सिरे से तैयार करने की कवायद चल रही है। इसी क्रम में 6 अगस्त को प्रदेश की सभी संगठनात्मक कमेटियों को भंग कर दिया गया था। उस समय माना जा रहा था कि पार्टी जल्द ही नई कमेटियों का गठन कर संगठन को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाएगी। हालांकि, ढाई महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी नई कमेटियों के गठन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। अब भंग कमेटियों के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को दिल्ली बुलाने के निर्देश ने पार्टी के भीतर चल रही गतिविधियों को फिर चर्चा में ला दिया है।
बताया जा रहा है कि अब्दुल बारी सिद्दीकी ने जिला और प्रखंड स्तर की पुरानी कमेटियों को पत्र भेजकर दिल्ली पहुंचने का निर्देश दिया है। यह कवायद आगामी राजनीतिक कार्यक्रम की तैयारियों से जुड़ी बताई जा रही है। 1 नवंबर को नई दिल्ली में विपक्षी दलों के गठबंधन 'इंडिया' की ओर से 'वोट बचाओ, देश बचाओ' महारैली प्रस्तावित है। इस रैली में राजद की भागीदारी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजस्वी यादव के भी दिल्ली पहुंचने की बात सामने आई है।
महारैली को सफल बनाने के लिए राजद ने अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को एकजुट करने की तैयारी तेज कर दी है। सांसदों, विधायकों, विधान पार्षदों और संगठन के विभिन्न स्तरों पर सक्रिय नेताओं के साथ जिला एवं प्रखंड स्तर के कार्यकर्ताओं को भी दिल्ली पहुंचने का निर्देश दिया गया है। पार्टी की कोशिश है कि बिहार से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता इस महारैली में शामिल हों, ताकि विपक्षी एकजुटता का संदेश मजबूती से दिया जा सके।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अधिक चर्चा अब्दुल बारी सिद्दीकी के इस्तीफे को लेकर हो रही है। राष्ट्रीय प्रधान महासचिव पद से इस्तीफा देने के बावजूद उनके संगठनात्मक कामकाज में सक्रिय रहने की बात सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने अभी तक उनके इस्तीफे को औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं किया है। उन्हें मौखिक रूप से कामकाज संभालते रहने को कहा गया है। यही वजह है कि उनके ताजा निर्देश के बाद पार्टी में उनकी वर्तमान भूमिका को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
राजद की ओर से इस कवायद को तेजस्वी यादव के निर्देशों के अनुरूप रैली की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि नई कमेटियों का गठन नहीं होने के बावजूद पुराने संगठनात्मक नेटवर्क का इस्तेमाल कर कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया जा रहा है। जिला और प्रखंड स्तर पर पहले से काम कर चुके पदाधिकारियों के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को दिल्ली की महारैली में शामिल कराने की रणनीति अपनाई जा सकती है।
बिहार विधानसभा चुनाव के बाद राजद के सामने संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरने की चुनौती है। पार्टी के लिए यह जरूरी माना जा रहा है कि जमीनी स्तर पर संगठन को फिर से सक्रिय किया जाए और आगामी राजनीतिक गतिविधियों के लिए कार्यकर्ताओं को तैयार रखा जाए। ऐसे में दिल्ली की महारैली राजद के लिए अपनी राजनीतिक ताकत और संगठनात्मक क्षमता प्रदर्शित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर बन सकती है।
हालांकि, संगठनात्मक कमेटियों के भंग होने के बाद नई कमेटियों का गठन नहीं होना और इस्तीफे के बावजूद अब्दुल बारी सिद्दीकी का निर्देश जारी करना कई सवाल खड़े कर रहा है। अब देखना होगा कि दिल्ली की महारैली के बाद राजद अपने संगठनात्मक ढांचे में बदलाव को लेकर कोई बड़ा फैसला करता है या नहीं। साथ ही, सिद्दीकी के इस्तीफे पर अंतिम निर्णय कब लिया जाता है और भविष्य में संगठन की जिम्मेदारी किसे सौंपी जाती है, इस पर भी राजनीतिक हलकों की नजर बनी हुई है।
मिथिला हिन्दी न्यूज | रोहित कुमार सोनू, संपादक
