तिरहुत स्नातक MLC चुनाव में हार के बाद NDA में घमासान, अभिषेक झा का अभिमन्यु वाला बयान और देवेश चंद्र ठाकुर के आरोपों से बढ़ी सियासी हलचल

बिहार की राजनीति में तिरहुत स्नातक विधान परिषद चुनाव के नतीजे के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर सियासी हलचल तेज हो गई है। चुनाव में हार के बाद आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। NDA के प्रत्याशी रहे अभिषेक झा ने अपनी हार को लेकर महाभारत के अभिमन्यु का उदाहरण दिया है, वहीं जदयू सांसद देवेश चंद्र ठाकुर ने गठबंधन के कुछ नेताओं पर भीतरघात के आरोप लगाए हैं। दूसरी ओर, रीगा से भाजपा विधायक बैद्यनाथ प्रसाद ने NDA की एकजुटता का बचाव करते हुए इन आरोपों पर पलटवार किया है। इन बयानों के बाद तिरहुत की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है। अभिषेक झा की हार के बाद सबसे अधिक चर्चा उनके सोशल मीडिया पोस्ट की हो रही है। उन्होंने अपने समर्थकों और मतदाताओं के प्रति आभार जताते हुए कहा कि चुनाव परिणाम भले ही उनके पक्ष में नहीं आया, लेकिन लोगों का प्यार और विश्वास उनके लिए महत्वपूर्ण है। हालांकि, उनके बयान में अभिमन्यु और चक्रव्यूह का जिक्र राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। उनके इस उदाहरण को NDA के भीतर चुनावी समर्थन और आपसी तालमेल से जोड़कर देखा जा रहा है। अभिषेक झा ने करीब 4700 मतपत्रों को अमान्य किए जाने का भी दावा किया है। उनके अनुसार, इन मतपत्रों पर उनके नाम के सामने टिक का निशान होने के कारण उन्हें अमान्य कर दिया गया। उनका मानना है कि यदि इन मतपत्रों को वैध माना जाता तो चुनाव का परिणाम अलग हो सकता था। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। इसलिए मतपत्रों की वैधता और चुनाव परिणाम पर उनके संभावित प्रभाव को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक चुनावी रिकॉर्ड देखना जरूरी होगा। इस बीच, जदयू सांसद देवेश चंद्र ठाकुर के बयान ने विवाद को और हवा दे दी है। उन्होंने गठबंधन के कुछ नेताओं की नीयत पर सवाल उठाते हुए संकेत दिया कि चुनाव के दौरान सभी लोगों ने अपेक्षित सहयोग नहीं किया। उनके बयान से यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या NDA के भीतर कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पर्दे के पीछे अलग रणनीति अपनाई थी। हालांकि, भीतरघात के आरोपों की पुष्टि करने वाला कोई ठोस सार्वजनिक प्रमाण सामने आना बाकी है। देवेश चंद्र ठाकुर के आरोपों पर भाजपा विधायक बैद्यनाथ प्रसाद ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि NDA ने एकजुट होकर चुनाव लड़ा और गठबंधन के नेताओं तथा कार्यकर्ताओं ने प्रत्याशी की जीत के लिए मेहनत की। उन्होंने पिछले चुनाव की तुलना में अभिषेक झा को इस बार अधिक वोट मिलने का हवाला देते हुए गठबंधन के प्रयासों का बचाव किया। इस तरह, जहां जदयू सांसद चुनावी हार के पीछे गठबंधन के कुछ नेताओं की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं भाजपा विधायक इसे सामूहिक प्रयासों के बावजूद नहीं मिली सफलता के रूप में पेश कर रहे हैं। तिरहुत स्नातक MLC चुनाव के बाद सामने आए इन बयानों ने NDA के अंदरूनी समीकरणों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब सवाल यह है कि क्या गठबंधन के नेता इस विवाद को आपसी बातचीत से सुलझा पाएंगे या फिर चुनावी हार के बाद शुरू हुई बयानबाजी आने वाले दिनों में और तेज होगी। फिलहाल, अभिषेक झा के अमान्य मतपत्रों से जुड़े दावे की आधिकारिक पुष्टि और भीतरघात के आरोपों के समर्थन में ठोस प्रमाण सामने आने तक इस पूरे मामले को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। मिथिला हिन्दी न्यूज | रोहित कुमार सोनू, संपादक
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