दशहरे पर दिल्ली में बनेगा विशाल रावण का पुतला, ऊंचाई और खासियत जानकर रह जाएंगे हैरान

मिथिला हिन्दी न्यूज | रोहित कुमार सोनू, संपादक

दशहरा और रावण का नाम आते ही लोगों के मन में रावण दहन की तस्वीर उभरने लगती है। देशभर में विजयादशमी का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। इस दिन जगह-जगह रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है। लेकिन समय के साथ रावण के पुतले बनाने की परंपरा भी भव्य होती जा रही है। अब आयोजकों के बीच सबसे ऊंचा, सबसे आकर्षक और सबसे अलग पुतला बनाने की होड़ देखने को मिलती है।

दिल्ली में भी दशहरे के अवसर पर रावण के विशाल पुतले लोगों के आकर्षण का केंद्र बनते हैं। इन पुतलों को बनाने में कारीगर कई दिनों तक मेहनत करते हैं। पुतले की ऊंचाई, उसकी बनावट, सजावट और सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाता है। विशालकाय पुतलों को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग दशहरा मैदानों में पहुंचते हैं।

विशाल पुतलों की ऊंचाई और बनावट बनती है चर्चा का विषय

दशहरे पर रावण के पुतलों को लेकर लोगों में खास उत्साह रहता है। कई जगहों पर आयोजक पहले से ही पुतले की ऊंचाई और उसकी खासियतों का प्रचार करते हैं। कहीं आकर्षक चेहरे और विशाल मुकुट वाले पुतले बनाए जाते हैं, तो कहीं आधुनिक तकनीक और विशेष सजावटी सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है।

कुछ आयोजक बारिश और नमी से पुतले को बचाने के लिए भी विशेष इंतजाम करते हैं, ताकि मौसम खराब होने पर भी रावण दहन का कार्यक्रम प्रभावित न हो। हालांकि, पुतले की वास्तविक ऊंचाई, लागत और मौसम से बचाव की व्यवस्था की जानकारी संबंधित आयोजकों की घोषणा के आधार पर ही स्पष्ट होती है।

दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विजयादशमी का पर्व भगवान श्रीराम की ओर से रावण पर विजय प्राप्त करने की स्मृति में मनाया जाता है। इस अवसर पर रावण दहन के माध्यम से अहंकार, अन्याय और बुराई के अंत का संदेश दिया जाता है।

दिल्ली सहित देश के विभिन्न शहरों में दशहरा उत्सव के दौरान मेले, सांस्कृतिक कार्यक्रम और रामलीला का आयोजन किया जाता है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में इस पर्व को लेकर उत्साह रहता है। विशाल रावण के पुतले लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र जरूर होते हैं, लेकिन दशहरे का मूल संदेश यही है कि अंततः सत्य और धर्म की जीत होती है।

मिथिला हिन्दी न्यूज | रोहित कुमार सोनू, संपादक

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