सीतामढ़ी। तिरहुत स्नातक एवं शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनावी माहौल में सीतामढ़ी जिले की राजनीति को लेकर कई तरह के संकेत सामने आ रहे हैं। मिथिला हिन्दी न्यूज़ के फील्ड सर्वे के दौरान यह बात सामने आई कि इस बार एनडीए के घटक दलों के बीच वैसी चुनावी समन्वय व्यवस्था दिखाई नहीं दी, जैसी पिछले चुनावों में देखने को मिलती रही है।
ग्राउंड पर सबसे बड़ी चर्चा भाजपा और जदयू के अलग-अलग चुनावी कैंप को लेकर रही। भाजपा का अपना अलग कैंप नजर आया, जबकि जदयू की गतिविधियां अलग दिखाई दीं। खास तौर पर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के कैंप में भाजपा का प्रभाव और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के कैंप में जदयू की सक्रियता अलग-अलग दिखाई देने की बात सामने आई।
फील्ड सर्वे के दौरान कार्यकर्ताओं और स्थानीय राजनीतिक लोगों के बीच यह चर्चा भी रही कि जदयू समर्थक खेमे में भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं को अपेक्षित महत्व नहीं मिला, वहीं भाजपा खेमे में भी जदयू की सक्रिय भागीदारी पहले जैसी नजर नहीं आई। हालांकि यह फील्ड स्तर पर सामने आया राजनीतिक आकलन है, इसे किसी दल का आधिकारिक बयान नहीं माना जा सकता।
यही वजह है कि इस चुनाव में एनडीए के भीतर आपसी समन्वय को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पहले चुनावों में जहां गठबंधन के नेता और कार्यकर्ता एक साथ रणनीति बनाते और वोटरों तक संयुक्त संदेश पहुंचाते दिखाई देते थे, वहीं इस बार कई जगहों पर अलग-अलग कैंप और अलग-अलग रणनीति की चर्चा रही।
सीतामढ़ी के अलावा पुपरी, नानपुर और चोरौत इलाके में भी चुनावी समीकरण को लेकर अलग तस्वीर देखने को मिली। फील्ड सर्वे में रश्मि गौतम के पक्ष में भूमिहार वोटों के एक हिस्से के झुकाव की चर्चा सामने आई है। वहीं बाजपट्टी क्षेत्र में एनडीए के प्रत्याशी अभिषेक झा की स्थिति मजबूत बताई जा रही है।
मिथिला हिन्दी न्यूज़ के अनुमानित फील्ड आकलन में अभिषेक झा को लगभग 30–34 प्रतिशत, रश्मि गौतम को 28–32 प्रतिशत, डॉ. विमोहन कुमार को 16–20 प्रतिशत और बंशीधर ब्रजवासी को 8–12 प्रतिशत के दायरे में समर्थन मिलने का अनुमान लगाया गया है। यह आंकड़े एग्जिट पोल या आधिकारिक परिणाम नहीं, बल्कि फील्ड स्तर पर प्राप्त संकेतों और राजनीतिक आकलन पर आधारित अनुमान हैं।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि चुनावी मुकाबला बेहद करीबी दिखाई दे रहा है। ऐसे में एनडीए के भीतर भाजपा-जदयू के बीच बेहतर समन्वय हुआ या नहीं, इसका असर अंतिम परिणाम पर कितना पड़ा—यह चुनाव परिणाम आने के बाद ही स्पष्ट होगा।
फिलहाल सीतामढ़ी की ग्राउंड रिपोर्ट यही संकेत दे रही है कि इस बार एनडीए का चुनावी मैनेजमेंट पहले जैसा एकजुट नजर नहीं आया और भाजपा-जदयू के अलग-अलग कैंप ने चुनावी माहौल में नई राजनीतिक चर्चा को जन्म दे दिया है।