मिथिला हिन्दी न्यूज | रोहित कुमार सोनू
हिंदू धर्म में दीपावली का त्योहार प्रकाश, खुशहाली और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इस दिन घरों को दीपों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया जाता है। शाम होते ही हर घर में दीपक जलने लगते हैं। कोई पूजा स्थल पर दीप रखता है तो कोई मुख्य दरवाजे और आंगन को दीपों से रोशन करता है। हालांकि, दीपावली पर दर्जनों दीपक जलाने की परंपरा है, लेकिन कई परिवारों में विशेष रूप से पांच स्थानों पर दीपक जलाने का रिवाज भी प्रचलित है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हिंदू धर्म में दीपक को प्रकाश, ज्ञान और चेतना का प्रतीक माना जाता है। दीपक की लौ जिस तरह अंधकार को दूर करती है, उसी तरह आध्यात्मिक रूप से यह जीवन से अज्ञानता दूर कर ज्ञान और सकारात्मक विचारों का प्रकाश फैलाने का संदेश देती है। यही वजह है कि दीपावली पर दीप जलाना केवल सजावट नहीं, बल्कि जीवन में सुख, शांति और खुशहाली का स्वागत करने की परंपरा है।
इन पांच स्थानों पर दीपक जलाने की है परंपरा
1. पूजा स्थल पर जलाएं पहला दीपक
दीपावली की शाम सबसे पहले घर के पूजा स्थल पर दीपक जलाने की परंपरा है। यहां मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि पूजा स्थल पर दीप जलाकर परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना करनी चाहिए।
2. घर के मुख्य दरवाजे पर जलाएं दीपक
मुख्य प्रवेश द्वार पर दीपक जलाना शुभ माना जाता है। इसे घर में आने वाले मेहमानों के स्वागत और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। दीपावली की रात लोग अपने मुख्य दरवाजे को दीपों से सजाते हैं, ताकि घर का प्रवेश द्वार रोशनी से जगमगाता रहे।
3. तुलसी के पौधे के पास जलाएं दीपक
हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे को अत्यंत पवित्र और पूजनीय माना जाता है। कई घरों में दीपावली की शाम तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाकर पूजा की जाती है। मान्यता है कि तुलसी के पास दीप जलाने से घर में सुख-शांति और शुभता का वातावरण बना रहता है।
4. घर के आंगन में जलाएं दीपक
पुराने समय में आंगन परिवार के सभी सदस्यों के एक साथ बैठने और समय बिताने की प्रमुख जगह हुआ करता था। यही कारण है कि आज भी कई परिवारों में दीपावली के दिन आंगन में दीपक जलाने की परंपरा निभाई जाती है। दीपों से सजा आंगन परिवार की एकता, खुशियों और उत्सव की खूबसूरती को दर्शाता है।
5. रसोईघर में भी जलाएं दीपक
कुछ परिवारों में दीपावली की शाम रसोईघर या घर के किसी शांत और सुरक्षित कोने में भी दीपक जलाने की परंपरा है। रसोई को अन्न और परिवार के पोषण से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। यहां दीप जलाकर परिवार के लिए अन्न-धन की कमी न होने और खुशहाली बने रहने की कामना की जाती है।
दीपक जलाने के पीछे छिपा है विशेष संदेश
दीपावली पर अलग-अलग स्थानों पर दीपक जलाने का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। यह परंपरा हमें अंधकार से प्रकाश की ओर, अज्ञान से ज्ञान की ओर और निराशा से आशा की ओर बढ़ने का संदेश देती है। हालांकि, पांच दीपक जलाने के स्थानों को लेकर अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में परंपराएं भिन्न हो सकती हैं।
इस दीपावली अपने घर को दीपों से रोशन करने के साथ-साथ अपने मन में भी प्रेम, दया, सद्भाव और इंसानियत का दीप जलाएं। क्योंकि असली दीपावली तभी है, जब घर के साथ-साथ किसी जरूरतमंद की जिंदगी में भी खुशियों का उजाला पहुंचे।
मिथिला हिन्दी न्यूज | संपादक: रोहित कुमार सोनू