आलोक धन्वा कवि थे बिहार गौरव राष्ट्रकवि दिनकर प्रो• अवधेश


मोरवा/संवाददाता। 


आलोक धनवा कवि थे बिहार गौरव राष्ट्रकवि दिनकर। उक्त बातें कहीं हिंदी विभाग के वरिष्ठ प्राध्यापक प्रो सतीश कुमार जाने स्थानीय केएसआर कॉलेज सरायरंजन में राष्ट्रकवि दिनकर की एक सौ बारहवें जयंती समारोह को संबोधित करते हुए। प्रोफेसर झा ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रकवि दिनकर की कालजयी रचना रश्मिरथी जीवन में मानवता की स्थापना का वह अमर संदेश देती है जिससे इंसान आज भी भगवान बन सकता है। उर्वशी प्रबंध काव्य के द्वारा राष्ट्रकवि दिनकर ने स्वर्ग की महानता पर धरती की महानता को स्थापित करते हुए, धरती को स्वर्ग से भी कहीं अधिक श्रेष्ठ साबित करने का सफल प्रयास किया है। प्रो झा ने बताया कि राष्ट्र कवि दिनकर की ससुराल समस्तीपुर जिला तो है ही , कर्म भूमि भी राष्ट्रकवि दिनकर का समस्तीपुर जिला ही है।अपने यौवन काल में दलसिंह सराय अनुमंडल में रजिस्ट्रार का काम किया करते थे , जहां पर उन्होंने अपनी दर्जनों रचनाओं का सृजन किया था। प्रसाद झा ने बताया कि राष्ट्रकवि दिनकर वीर रस के वजह से कभी होने के साथ भक्त कवि भी थे। राष्ट्रकवि दिनकर , जब बाबा नगरी देवघर में बाबा बैद्यनाथ को हिमालय कविता सुनाते हुए कहा, कह दे शंकर से आज फिर, करें प्रलय नृत्य फिर एक बार। उसी समय सन 1934 में भूकंप शुरू हो गया था। राष्ट्रकवि दिनकर जब सन 1974 में अपने अवसान वेला मेंतिरुपति बालाजी को हारे को हरिनाम सुना रहे थे उसी समय हृदयाघात से उनकी मौत हुई।प्रो जनार्दन चौधरी ने राष्ट्रकवि दिनकर को युगांतर कवि बतलाया। डॉ विजय कुमार झा,डॉ गगनदेव चौधरी, प्रो मनोज कुमार झा, प्रोहरे कृष्ण चौधरी, प्रो शेखर प्रसाद चौधरी, डॉ उषा कुमारी आदि ने दिनकर जयंती समारोह को संबोधित किया। मौके पर अधिकांश कॉलेज कर्मी मौजूद थे।

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