नई दिल्ली।
देशभर के करोड़ों पैन कार्ड धारकों के लिए यह एक अहम और राहत भरी खबर है। बढ़ते डिजिटल लेनदेन और ऑनलाइन फ्रॉड को देखते हुए भारत सरकार ने पैन कार्ड को लेकर एक नई और सख्त पहल शुरू की है। इसका मकसद टैक्स चोरी, फर्जी पैन कार्ड और वित्तीय धोखाधड़ी पर पूरी तरह रोक लगाना है।
डिजिटल इंडिया के इस दौर में पैन कार्ड अब केवल टैक्स भरने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह भारत की डिजिटल आर्थिक पहचान का मजबूत आधार बन चुका है। पैन कार्ड आयकर विभाग द्वारा जारी किया गया एक 10 अंकों का यूनिक अल्फा-न्यूमेरिक नंबर होता है, जिसके जरिए व्यक्ति के सभी बड़े वित्तीय लेनदेन को ट्रैक किया जाता है।
सरकार के अनुसार, हाल के वर्षों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां एक ही व्यक्ति ने नाम बदल-बदलकर या गलत जानकारी देकर एक से अधिक पैन कार्ड बनवा लिए और उसका उपयोग फ्रॉड के लिए किया। अब ऐसे मामलों पर पूरी तरह नकेल कसने की तैयारी कर ली गई है। आयकर विभाग और अन्य वित्तीय एजेंसियां मिलकर संदिग्ध लेनदेन की कड़ी निगरानी कर रही हैं।
कहां-कहां पैन कार्ड अनिवार्य?
आज के समय में पैन कार्ड के बिना कोई भी बड़ा वित्तीय काम संभव नहीं है।
- ₹50,000 से अधिक का बैंक लेनदेन
- म्यूचुअल फंड या शेयर बाजार में निवेश
- प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री
- इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करना
इन सभी कार्यों के लिए पैन कार्ड अनिवार्य हो चुका है।
सरकार ने पैन कार्ड धारकों से अपील की है कि वे अपने पैन से जुड़ी सभी जानकारियों को सही और अपडेट रखें। गलत जानकारी या फर्जी पैन कार्ड का इस्तेमाल करने वालों पर आने वाले समय में सख्त कार्रवाई की जाएगी।
फ्रॉड से बचाव और आर्थिक पारदर्शिता के लिए यह पहल आम जनता के हित में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
देश और आर्थिक नीतियों से जुड़ी ऐसी ही अहम खबरों के लिए पढ़ते रहिए मिथिला हिन्दी न्यूज