फ़र्ज़ी डिग्री पर बड़ा प्रहार: राजस्थान में अब डिग्री-डिप्लोमा पर अनिवार्य होगा क्यूआर कोड


राजस्थान सरकार ने फ़र्ज़ी डिग्री और दस्तावेज़ों के ज़रिये नौकरी पाने के मामलों पर लगाम लगाने के लिए बड़ा और तकनीकी कदम उठाया है। राज्य के सभी सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों द्वारा जारी की जाने वाली डिग्री, डिप्लोमा, मार्कशीट और माइग्रेशन सर्टिफिकेट पर अब अनिवार्य रूप से क्यूआर कोड अंकित किया जाएगा। अधिकारियों ने गुरुवार को इसकी जानकारी दी।

भर्ती प्रक्रिया होगी तेज और पारदर्शी

आधिकारिक बयान के मुताबिक, भर्ती प्रक्रियाओं के दौरान बड़ी संख्या में संदिग्ध दस्तावेज़ सामने आते हैं, जिनकी जांच में लंबा समय लगता है। क्यूआर कोड व्यवस्था लागू होने के बाद भर्ती संस्थान एक क्लिक में ही अभ्यर्थियों के दस्तावेज़ों की पुष्टि संबंधित विश्वविद्यालय के मूल रिकॉर्ड से सीधे कर सकेंगे। इससे न केवल भर्ती प्रक्रिया तेज होगी, बल्कि किसी भी प्रकार की विसंगति तुरंत पकड़ में आ जाएगी।

RPSC के सुझाव पर सरकार का फैसला

दस्तावेज़ों की पुष्टि और फर्जीवाड़े की रोकथाम को लेकर राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) ने राज्य सरकार को विश्वविद्यालयों के दस्तावेज़ों में तकनीकी बदलाव का सुझाव दिया था। इसी क्रम में

  • तकनीकी शिक्षा विभाग ने 3 सितंबर को और
  • उच्च शिक्षा विभाग ने 26 सितंबर को
    राज्य के सभी सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों को आवश्यक निर्देश जारी किए।

फर्जीवाड़े पर कसेगा शिकंजा

क्यूआर कोड से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड के कारण अब फर्जी डिग्री, डुप्लीकेट मार्कशीट और छेड़छाड़ किए गए दस्तावेज़ों की पहचान आसान हो जाएगी। यह कदम युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के साथ-साथ भर्ती संस्थानों का भरोसा भी मजबूत करेगा।

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