खच्चर खातों के जरिए साइबर ठगी, बैंकर्स की मिलीभगत से शातिरों को फायदा


संवाद 

पटना/मुजफ्फरपुर। बिहार में साइबर ठगी का जाल लगातार फैलता जा रहा है और इसमें कुछ बैंककर्मियों की भूमिका भी संदिग्ध होती जा रही है। जांच में सामने आया है कि खच्चर खातों (म्यूल अकाउंट) के जरिए बैंकर्स साइबर शातिरों को सीधा लाभ पहुंचा रहे हैं। इन खातों का इस्तेमाल अवैध रकम के लेनदेन और उसे कैश कराने के लिए किया जा रहा है।

हाल ही में मुजफ्फरपुर में एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां दिल्ली के साइबर शातिरों ने करीब आठ करोड़ रुपये दरभंगा की एक स्वयंसेवी संस्था के खाते में ट्रांसफर किए। इसके बाद यह रकम मुजफ्फरपुर में अलग-अलग माध्यमों से कैश करा ली गई। जांच के दौरान इस पूरे नेटवर्क में दिल्ली के बड़े साइबर गैंग की संलिप्तता भी उजागर हुई है।

पुलिस और साइबर सेल की प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि बिना बैंक अधिकारियों की लापरवाही या मिलीभगत के इतना बड़ा ट्रांजैक्शन संभव नहीं था। खच्चर खातों के जरिए पहले अवैध रकम डाली जाती है और फिर उसे अलग-अलग जगहों से निकाल लिया जाता है, ताकि असली अपराधियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाए।

साइबर अपराध शाखा अब न सिर्फ खाताधारकों बल्कि संबंधित बैंककर्मियों की भूमिका की भी गहराई से जांच कर रही है। सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं और कई लोगों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है।

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