बिहार की सियासत से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) के तीन विधायकों ने दिल्ली जाकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की है। इस मुलाकात को सियासी गलियारों में बेहद अहम माना जा रहा है। खास बात यह है कि इन विधायकों ने अपनी ही पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा की ‘लिट्टी-चोखा पार्टी’ से भी दूरी बना ली है।
इस घटनाक्रम ने रालोमो के भीतर चल रही अंदरूनी खटपट को एक बार फिर उजागर कर दिया है। इससे पहले भी पार्टी में असंतोष और गुटबाजी की खबरें सामने आती रही हैं, हालांकि हर बार पार्टी नेतृत्व की ओर से एकजुटता का दावा किया जाता रहा है और किसी भी तरह की नाराजगी से इनकार किया जाता रहा है।
इधर, उपेंद्र कुशवाहा पर परिवारवाद के आरोप भी तेज हो गए हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने बेटे दीपक प्रकाश को बिना चुनाव लड़े ही मंत्री बनवा दिया, जिससे पार्टी के कई नेताओं और विधायकों में असंतोष बढ़ा है। माना जा रहा है कि इसी नाराजगी का असर अब खुलकर सामने आने लगा है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि यह असंतोष यूं ही बढ़ता रहा, तो आने वाले दिनों में रालोमो में बड़ी टूट देखने को मिल सकती है, जिसका सीधा फायदा भाजपा को मिल सकता है।
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