बिहार की राजनीति में एक बार फिर उपेंद्र कुशवाहा और उनकी पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। पार्टी के भीतर गहराते असंतोष और अंदरूनी कलह के बीच यह सवाल उठने लगा है कि क्या आने वाले दिनों में RLM में बड़ी टूट देखने को मिलेगी। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पार्टी के तीन विधायक भारतीय जनता पार्टी (BJP) के संपर्क में हैं, जिससे कुशवाहा की सियासी स्थिति कमजोर हो सकती है।
डिनर पार्टी में गैरहाजिरी से बढ़ी अटकलें
हाल ही में पटना में उपेंद्र कुशवाहा द्वारा आयोजित लिट्टी-चोखा डिनर पार्टी में RLM के तीन विधायक शामिल नहीं हुए। बताया जा रहा है कि ये विधायक पहले ही भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर चुके हैं। इस घटनाक्रम के बाद यह कयास लगाए जाने लगे हैं कि पार्टी में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है और विधायकों का भरोसा नेतृत्व से उठता दिख रहा है।
परिवारवाद बना नाराजगी की बड़ी वजह
पार्टी के अंदर असंतोष की सबसे बड़ी वजह परिवारवाद को बताया जा रहा है। विधायकों का आरोप है कि उपेंद्र कुशवाहा ने अपने बेटे को मंत्री बनवाने में प्राथमिकता दी, जबकि पार्टी के अन्य विधायकों को कोई अहम जिम्मेदारी नहीं मिली। इससे पार्टी के अंदर नाराजगी और गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है।
राज्यसभा और मंत्री पद पर संकट?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर RLM में टूट होती है या विधायक भाजपा में शामिल होते हैं, तो इससे न सिर्फ उपेंद्र कुशवाहा की राज्यसभा की राह मुश्किल हो सकती है, बल्कि उनके बेटे के मंत्री पद पर भी खतरा मंडरा सकता है। हालांकि अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
भाजपा की बढ़ती भूमिका
सूत्रों के मुताबिक भाजपा इस पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है। अगर RLM के विधायक भाजपा में जाते हैं, तो इससे राज्य की सियासत में नए समीकरण बन सकते हैं और सत्तारूढ़ गठबंधन की ताकत भी बढ़ सकती है।
आगे क्या?
फिलहाल RLM की ओर से टूट या विद्रोह को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन जिस तरह से घटनाएं सामने आ रही हैं, उससे यह साफ है कि आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में बड़ा सियासी धमाका हो सकता है।
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