बिहार के वृद्ध-विधवा और दिव्यांग पेंशनधारकों को देना होगा जीवित प्रमाण पत्र, जानिए पूरी प्रक्रिया


बिहार सरकार ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के तहत मिलने वाली वृद्धावस्था, विधवा और दिव्यांग पेंशन को लेकर बड़ा फैसला लिया है। अब इन सभी पेंशनधारकों को हर वर्ष जीवित प्रमाण पत्र (Life Certificate) देना अनिवार्य होगा। ऐसा नहीं करने पर पेंशन की राशि रोकी जा सकती है। सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से पेंशन वितरण प्रणाली अधिक पारदर्शी बनेगी और फर्जी लाभार्थियों पर रोक लगेगी।

क्यों जरूरी किया गया जीवित प्रमाण पत्र

सरकार को कई मामलों में यह शिकायत मिल रही थी कि कुछ जगहों पर दिवंगत व्यक्तियों के नाम पर भी पेंशन जारी है। इसी को रोकने और वास्तविक लाभार्थियों तक पेंशन पहुंचाने के लिए अब आधार-आधारित जीवन प्रमाणीकरण की व्यवस्था लागू की गई है।

कैसे कराएं जीवित प्रमाण पत्र

पेंशनधारकों के लिए यह प्रक्रिया बेहद आसान रखी गई है—

  1. कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) से प्रमाणीकरण
    पेंशनधारक अपने नजदीकी CSC केंद्र पर जाकर आधार कार्ड के माध्यम से फिंगरप्रिंट या आइरिस स्कैन द्वारा जीवन प्रमाण पत्र बनवा सकते हैं। प्रमाणीकरण के बाद जानकारी सीधे सरकारी पोर्टल पर अपडेट हो जाती है।

  2. पंचायत स्तर पर सुविधा
    जिन बुजुर्गों या दिव्यांगों को चलने-फिरने में परेशानी है, उनके लिए पंचायत स्तर पर विशेष शिविर या घर-घर जाकर जीवन प्रमाण पत्र लेने की व्यवस्था भी की जाएगी।

  3. डिजिटल जीवन प्रमाण (Jeevan Pramaan)
    तकनीकी रूप से सक्षम पेंशनधारक ‘जीवन प्रमाण’ ऐप या पोर्टल के माध्यम से भी डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट बना सकते हैं।

कौन-कौन से दस्तावेज जरूरी

  • आधार कार्ड
  • पेंशन लाभार्थी संख्या / बैंक खाता विवरण
  • आधार से लिंक मोबाइल नंबर

समय पर न कराने पर क्या होगा

अगर तय समय सीमा के भीतर जीवित प्रमाण पत्र जमा नहीं किया गया, तो संबंधित पेंशनधारक की पेंशन अस्थायी रूप से रोक दी जाएगी। बाद में प्रमाण पत्र जमा करने पर पेंशन दोबारा शुरू की जा सकती है।

सरकार का मानना है कि इस कदम से पेंशन योजना में पारदर्शिता आएगी और वास्तविक जरूरतमंदों को समय पर सहायता मिल सकेगी।

वृद्ध, विधवा और दिव्यांग पेंशन से जुड़ी हर जरूरी खबर के लिए पढ़ते रहिए मिथिला हिन्दी न्यूज

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