संवाद
नई दिल्ली।
यूजीसी (UGC) द्वारा प्रस्तावित UGC Regulations 2026 को लेकर अब राजनीतिक हलकों में विरोध तेज़ होता दिख रहा है। मोदी सरकार की सहयोगी और बिहार की सत्ताधारी पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) ने इन नियमों पर कड़ा ऐतराज़ जताते हुए केंद्र सरकार को साफ़ संदेश दिया है।
जदयू नेताओं का कहना है कि किसी एक वर्ग को नाराज़ कर या बिना व्यापक सहमति के कानून लागू करना न केवल गलत है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के भी खिलाफ है।
नीतीश कुमार की पार्टी का सख्त रुख
जदयू का मानना है कि उच्च शिक्षा से जुड़े इतने अहम नियमों को लागू करने से पहले
- छात्रों
- शिक्षकों
- विश्वविद्यालयों
- और सामाजिक संगठनों
से व्यापक संवाद होना चाहिए था।
पार्टी नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इस मुद्दे पर ज़बरदस्ती फैसला लिया, तो इसके राजनीतिक और सामाजिक परिणाम हो सकते हैं।
‘मनाना है, नाराज़ करके कानून लागू करना गलत’
जदयू का कहना है ,
“कानून जनता के लिए होता है, जनता के खिलाफ नहीं। अगर कोई नियम समाज के किसी हिस्से में भ्रम और असंतोष पैदा कर रहा है, तो सरकार की जिम्मेदारी है कि वह लोगों को समझाए, न कि उन्हें नाराज़ कर फैसले थोप दे।”
UGC Regulations 2026 पर क्यों है विवाद?
UGC के नए नियमों को लेकर
- छात्र संगठनों में असमंजस
- सोशल मीडिया पर विरोध
- और ‘भारत बंद’ जैसी अफवाहें
देखी जा रही हैं। हालांकि, अब तक किसी बड़े संगठन ने आधिकारिक तौर पर बंद का आह्वान नहीं किया है, लेकिन असंतोष लगातार बढ़ रहा है।
सहयोगी दल का विरोध, केंद्र के लिए संकेत
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर NDA के भीतर ही सहयोगी दल इस तरह खुलकर विरोध करने लगें, तो यह केंद्र सरकार के लिए चेतावनी संकेत है।
खासकर तब, जब शिक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर फैसला लिया जा रहा हो।
आगे क्या?
अब सबकी नजर इस पर है कि
- क्या केंद्र सरकार UGC Regulations 2026 पर पुनर्विचार करेगी?
- या फिर सहयोगी दलों और विरोधी संगठनों की आपत्तियों को नज़रअंदाज़ कर नियम लागू करेगी?
फिलहाल, यह साफ है कि UGC Regulations 2026 आने वाले दिनों में एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बनने जा रहा है।
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