नई दिल्ली/लखनऊ।
यूजीसी के नए नियम UGC Regulations 2026 अब सिर्फ विपक्ष या सहयोगी दलों तक सीमित नहीं रहे। इस नियम के खिलाफ अब भारतीय जनता पार्टी के भीतर ही जबरदस्त बगावत देखने को मिल रही है। पार्टी के जमीनी नेता, पदाधिकारी और यहां तक कि सरकारी अधिकारी भी इसे “ब्लैक लॉ (काला कानून)” करार देते हुए खुलकर सामने आ गए हैं।
नोएडा से उठी चिंगारी, लखनऊ में बनी आग
नोएडा में बीजेपी युवा मोर्चा के उपाध्यक्ष राजू पंडित ने इस कानून को भेदभावपूर्ण बताते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
उन्होंने साफ कहा कि यह नियम सामाजिक संतुलन के खिलाफ है और छात्रों के अधिकारों का हनन करता है।
लखनऊ में बगावत और गहरी हो गई, जब मंडल महामंत्री समेत 11 पदाधिकारियों ने सामूहिक इस्तीफा सौंप दिया। पार्टी के अंदर इसे अभूतपूर्व असंतोष माना जा रहा है।
रायबरेली और श्रावस्ती तक फैली नाराज़गी
बगावत की यह आग अब सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रही।
- रायबरेली में किसान मोर्चा के उपाध्यक्ष श्याम सुंदर त्रिपाठी
- श्रावस्ती में बीजेपी टीचर्स सेल के डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर
ने भी अपने-अपने पदों से इस्तीफा देकर पार्टी नेतृत्व को कड़ा संदेश दिया है।
सरकारी महकमे में भी असर
UGC Regulations 2026 का असर अब प्रशासनिक तंत्र में भी दिखने लगा है।
बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने सवर्ण छात्रों के अधिकारों के हनन का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
यह घटनाक्रम सरकार के लिए गंभीर चेतावनी माना जा रहा है।
बीजेपी विधायक भी बोले— ‘दोहरे मापदंड बंद हों’
बीजेपी के अंदरुनी हालात इतने खराब हो चुके हैं कि अब पार्टी के विधायक भी खुलकर सवाल उठाने लगे हैं।
बीजेपी विधायक प्रतीक भूषण सिंह ने UGC के इन नियमों में तत्काल संशोधन की मांग की है और सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है।
कवि कुमार विश्वास का तंज
हमेशा सरकार की नीतियों का समर्थन करने वाले कवि कुमार विश्वास ने भी इस मुद्दे पर तंज कसते हुए सरकार को आईना दिखाया।
उनकी टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर बहस और तेज हो गई, जिससे बीजेपी की राजनीतिक फजीहत और बढ़ गई।
राजनीतिक संकट में UGC Regulations 2026
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि
- सहयोगी दलों का विरोध
- पार्टी के भीतर इस्तीफों की बाढ़
- और प्रशासनिक अधिकारियों की नाराज़गी
इस बात का संकेत है कि UGC Regulations 2026 अब सरकार के लिए एक बड़े राजनीतिक संकट में बदलता जा रहा है।
अब सवाल यह है कि
- क्या केंद्र सरकार समय रहते नियमों में संशोधन करेगी?
- या फिर असंतोष को नज़रअंदाज़ कर आगे बढ़ेगी?
फिलहाल इतना तय है कि UGC Regulations 2026 ने बीजेपी की अंदरूनी एकजुटता को गंभीर चुनौती दे दी है।
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