सहरसा जिले में मिट्टी की घटती उर्वराशक्ति को सुधारने के लिए कृषि विभाग ने अहम कदम उठाया है। रासायनिक खाद के बढ़ते प्रयोग के असर को कम करने के लिए अब बड़े पैमाने पर वैकल्पिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है।
योजना के तहत 36 हजार हेक्टेयर में मूंग और 10 हजार हेक्टेयर में ढैंचा की खेती कराई जाएगी। खास बात यह है कि मूंग की फसल में छीमी (फलियां) तोड़ने के बाद उसके पौधों को हरी खाद के रूप में खेत में ही मिलाया जाएगा, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी।
कृषि विभाग का मानना है कि इस पहल से न केवल मिट्टी की गुणवत्ता सुधरेगी, बल्कि किसानों को बेहतर उत्पादन भी मिलेगा और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी।
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