बाबुल सुप्रियो ने बीजेपी में वापसी की अटकलों पर लगाया विराम, बोले- “मैंने खुद को अपने तरीके से संभाल लिया है”


पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर चर्चाओं का बाजार गर्म है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और वर्तमान राज्यसभा सांसद Babul Supriyo ने सोशल मीडिया पर एक लंबा भावुक पोस्ट लिखकर बीजेपी में वापसी की अटकलों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि न तो बीजेपी को उनकी जरूरत है और न ही उन्हें बीजेपी की जरूरत है।

बाबुल सुप्रियो ने अपने राजनीतिक सफर, संघर्ष और निजी दर्द को साझा करते हुए कहा कि उन्होंने 2014 में उस समय पश्चिम बंगाल में बीजेपी के लिए लड़ाई लड़ी, जब राज्य में पार्टी का कोई मजबूत संगठन नहीं था। उन्होंने दावा किया कि बिना किसी मजबूत संगठन के उन्होंने बंगाल से बीजेपी की इकलौती सीट जीतकर पार्टी को नई पहचान दिलाई थी।

अपने पोस्ट में बाबुल सुप्रियो ने उन मुश्किल दिनों को भी याद किया, जब उनकी मां का कोविड के दौरान निधन हो गया था और उनका परिवार गहरे सदमे में था। उन्होंने कहा कि उस कठिन समय में उन्हें पार्टी के भीतर अपेक्षित समर्थन नहीं मिला। बाबुल ने यह भी आरोप लगाया कि जिन लोगों के खिलाफ उन्होंने लंबे समय तक संघर्ष किया, बाद में उन्हीं नेताओं को बीजेपी में शामिल कर लिया गया और आज वे विधायक बने हुए हैं।

उन्होंने लिखा कि उन्हें पिछले कुछ दिनों में लगातार फोन और संदेश मिल रहे थे कि वे बीजेपी में वापस लौट आएं, लेकिन उन्होंने साफ कहा कि वे “Use & Throw” की राजनीति का हिस्सा नहीं बन सकते। बाबुल सुप्रियो ने कहा कि उन्होंने पार्टी छोड़ते समय किसी पद से चिपके रहने की कोशिश नहीं की, बल्कि हर जिम्मेदारी से इस्तीफा देकर बाहर आए।

अपने बयान में उन्होंने यह भी कहा कि उनका पहला प्यार संगीत है और वे अब उसी दुनिया में लौटना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि पिछले पांच वर्षों में उन्होंने दो वाद्य यंत्र बजाना सीखना शुरू किया है और अपने पिता के साथ शांत जीवन बिता रहे हैं।

प्रधानमंत्री Narendra Modi का जिक्र करते हुए बाबुल सुप्रियो ने लिखा कि मोदीजी ने कभी कहा था – “मुझे संसद में बाबुल चाहिए” और आज वे राज्यसभा में हैं।

पोस्ट के अंत में बाबुल सुप्रियो ने एक भावुक संदेश देते हुए लिखा कि अगर इंसान का भगवान पर विश्वास सच्चा हो, तो पुजारी बदल सकते हैं, लेकिन इंसान भगवान तक जरूर पहुंच जाता है।

बाबुल सुप्रियो का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल की राजनीति में लगातार दल-बदल और नई राजनीतिक संभावनाओं की चर्चा हो रही है। हालांकि उनके इस स्पष्ट संदेश के बाद बीजेपी में वापसी की अटकलों पर फिलहाल विराम लग गया है।

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