संघर्ष, गरीबी और परिवार के त्याग की कहानी से शुरू हुआ एक सफर अब करोड़ों की संपत्ति और जांच एजेंसियों की छापेमारी के कारण सुर्खियों में है। एक समय ऐसा था जब परिवार ने अभावों के बीच सपने संजोए थे। छोटे भाई ने केरोसिन बेचकर बड़े भाई की पढ़ाई का खर्च उठाया, ताकि परिवार की किस्मत बदल सके। कठिन परिस्थितियों के बीच गोपाल कुमार इंजीनियर बने तो पूरे परिवार को उम्मीद थी कि अब घर की तस्वीर बदल जाएगी।
लेकिन आज वही इंजीनियर एक अलग वजह से चर्चा में हैं। आय से अधिक संपत्ति मामले में हुई कार्रवाई के बाद गोपाल कुमार का नाम पूरे बिहार में सुर्खियां बटोर रहा है। पटना से लेकर झाझा और बनमनखी तक चली छापेमारी में करोड़ों की संपत्ति और नोटों की गड्डियों के खुलासे ने सभी को हैरान कर दिया है।
सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह रही कि एक तरफ जहां गोपाल कुमार के नाम पर बड़ी संपत्तियों का खुलासा हुआ, वहीं दूसरी तरफ उनका पैतृक घर अब भी जीर्ण-शीर्ण स्थिति में बताया जा रहा है। परिवार के सदस्य साधारण जीवन जी रहे हैं। आसपास के लोगों और रिश्तेदारों के लिए यह मामला किसी रहस्य से कम नहीं है।
गांव और आसपास के इलाके में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि जिस परिवार ने गरीबी और संघर्ष के बीच अपने बेटे को पढ़ाया, आखिर इतनी बड़ी संपत्ति कैसे खड़ी हुई। मामले में जांच एजेंसियां लगातार दस्तावेज खंगाल रही हैं और आगे और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
फिलहाल यह मामला पूरे बिहार में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग जांच के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं।
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