यदि आपको आज का दिन सामान्य दिनों की तुलना में कुछ लंबा महसूस हुआ है, तो यह आपका भ्रम नहीं बल्कि एक वैज्ञानिक सत्य है। 21 जून को पृथ्वी के उत्तरी गोलार्ध में वर्ष का सबसे लंबा दिन और सबसे छोटी रात होती है। इस खगोलीय घटना को ग्रीष्म संक्रांति (Summer Solstice) कहा जाता है। इसी कारण रविवार की रात अपेक्षाकृत छोटी महसूस होगी और सूरज सामान्य दिनों की तुलना में अधिक समय तक आसमान में दिखाई देगा।
ग्रीष्म संक्रांति के दिन सूर्य की किरणें पृथ्वी पर सबसे अधिक समय तक पड़ती हैं। इसका कारण पृथ्वी का अपनी धुरी पर लगभग 23.5 डिग्री झुका होना है। 21 जून के आसपास उत्तरी गोलार्ध सूर्य की ओर सबसे अधिक झुका रहता है, जिसके कारण यहां दिन लंबे और रातें छोटी हो जाती हैं।
मध्यप्रदेश में भी इस खगोलीय घटना का प्रभाव साफ दिखाई देगा। राज्य के भिंड जिले में दिन की अवधि लगभग 13 घंटे 50 मिनट तक रहेगी, जो प्रदेश में सबसे लंबी अवधि में से एक है। वहीं सिंगरौली में सूर्योदय सबसे पहले होगा और नीमच में सूर्य सबसे देर से अस्त होगा। इस वजह से अलग-अलग जिलों में दिन और रात की अवधि में थोड़ा अंतर देखने को मिलेगा।
आखिर क्यों होता है ऐसा?
बहुत से लोग मानते हैं कि गर्मी इसलिए बढ़ती है क्योंकि पृथ्वी सूर्य के अधिक करीब आ जाती है, लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है। वास्तव में ऋतुओं का परिवर्तन पृथ्वी की झुकी हुई धुरी के कारण होता है। जब उत्तरी गोलार्ध सूर्य की ओर झुका रहता है तो यहां अधिक समय तक धूप पड़ती है और दिन बड़े हो जाते हैं। इसके विपरीत दक्षिणी गोलार्ध में इस समय सबसे छोटा दिन और सबसे लंबी रात होती है।
इसके बाद क्या होगा?
21 जून के बाद धीरे-धीरे दिन छोटे होने लगेंगे और रातों की अवधि बढ़ने लगेगी। यह क्रम दिसंबर तक जारी रहेगा। इसके बाद 21 या 22 दिसंबर को शीतकालीन संक्रांति के दौरान उत्तरी गोलार्ध में वर्ष का सबसे छोटा दिन और सबसे लंबी रात दर्ज की जाती है।
सांस्कृतिक और वैज्ञानिक महत्व
ग्रीष्म संक्रांति केवल खगोलीय घटना ही नहीं, बल्कि दुनिया की कई सभ्यताओं में इसका सांस्कृतिक महत्व भी है। प्राचीन काल से ही लोग इस दिन को प्रकृति, सूर्य और कृषि चक्र से जोड़कर देखते रहे हैं। वैज्ञानिकों के लिए यह पृथ्वी की गति और अंतरिक्षीय घटनाओं को समझने का महत्वपूर्ण अवसर होता है।
आज जब सूरज देर तक आसमान में रहेगा और रात कुछ छोटी लगेगी, तब यह याद रखना दिलचस्प होगा कि हमारी पृथ्वी की एक छोटी-सी झुकाव वाली धुरी पूरे ग्रह पर दिन-रात और मौसमों का स्वरूप तय करती है।
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