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बिहार में नई जल नीति लागू करने की तैयारी, डिजिटल तकनीक से होगा नदियों और भूजल का प्रबंधन
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June 27, 2026
पटना: बिहार सरकार राज्य में जल संसाधनों के बेहतर उपयोग और नदियों के प्रभावी प्रबंधन के लिए नई जल नीति तैयार कर रही है। इस नीति के तहत आधुनिक तकनीक और डिजिटल सिस्टम का उपयोग कर जल प्रबंधन को अधिक पारदर्शी, वैज्ञानिक और प्रभावी बनाया जाएगा। सरकार का उद्देश्य पानी का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना, भूजल स्तर को संरक्षित करना और बाढ़-सूखे जैसी प्राकृतिक आपदाओं से समय रहते निपटना है।
नई जल नीति के तहत राज्य की जल प्रबंधन प्रणाली को पूरी तरह डिजिटल बनाया जाएगा। नदियों के जलस्तर की निगरानी अत्याधुनिक तकनीक के माध्यम से होगी, जिससे बाढ़ और सूखे की स्थिति का पहले से सटीक अनुमान लगाया जा सकेगा। इससे आपदा प्रबंधन में तेजी आएगी और जान-माल के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।
सरकार राज्य में जल संसाधनों से जुड़ी मौजूदा संस्थाओं की समीक्षा भी कर रही है। जरूरत पड़ने पर नई वाटर अथॉरिटी और अन्य संस्थानों का गठन किया जाएगा। इसके लिए जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण विभाग, जल शक्ति मंत्रालय के सहयोग से स्टेट वाटर रिसोर्स रिफॉर्म फ्रेमवर्क तैयार कर रहा है।
नई नीति की रूपरेखा तैयार करने के लिए मुख्य अभियंता की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है। इस समिति में जल संसाधन, कृषि, पर्यावरण, नगर विकास, पीएचईडी, ग्रामीण विकास और लघु जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है। समिति नीति के सभी पहलुओं की समीक्षा कर अंतिम प्रारूप तैयार करेगी।
सरकार भूजल संरक्षण और नदी संबंधी डेटा को अधिक सटीक बनाने पर भी विशेष ध्यान दे रही है। जल परियोजनाओं की डिजिटल मॉनिटरिंग की जाएगी और पुराने जल कानूनों को वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप संशोधित किया जाएगा।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद किसानों को नहरों के माध्यम से समय पर पर्याप्त सिंचाई का पानी उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों के लिए भी संतुलित जल आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। डैम में सेंसर आधारित मीटर लगाए जाएंगे और नहरों में पानी की बर्बादी रोकने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा।
सरकार का मानना है कि नई जल नीति लागू होने के बाद बिहार जल संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में अधिक आधुनिक, सुरक्षित और आत्मनिर्भर राज्य के रूप में उभरेगा। इससे जल संरक्षण, सिंचाई व्यवस्था और आपदा प्रबंधन में व्यापक सुधार होने की उम्मीद है।
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