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भोजपुर एनकाउंटर पर बवाल: भरत तिवारी की मौत के बाद ग्रामीणों में आक्रोश, फर्जी मुठभेड़ का आरोप
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يونيو 18, 2026
भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र स्थित बिलौटी गांव में पुलिस मुठभेड़ में घायल हुए भरत तिवारी की मौत के बाद इलाके में तनाव और आक्रोश का माहौल है। मृतक के परिजन, ग्रामीण और विस्थापित परिवार पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह एक फर्जी एनकाउंटर था, जबकि पुलिस का दावा है कि भरत तिवारी ने पुलिस टीम पर फायरिंग की थी, जिसके जवाब में कार्रवाई की गई।
घटना के बाद गांव में शोक और नाराजगी का माहौल देखा जा रहा है। परिजनों का कहना है कि भरत तिवारी को पुलिस ने पहले पकड़ा और बाद में उनकी हत्या कर दी। वहीं, पुलिस अपने दावे पर कायम है कि मुठभेड़ के दौरान भरत तिवारी घायल हुए थे और इलाज के दौरान उनकी मौत हुई।
ग्राउंड जीरो पर मौजूद ग्रामीणों और विस्थापित परिवारों ने भरत तिवारी को अपना "मसीहा" बताते हुए कहा कि उन्होंने वर्षों तक उनकी समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाने का काम किया। ग्रामीणों के अनुसार, बिजली, पानी, सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं के लिए भरत तिवारी लगातार संघर्ष करते रहे। लोगों का कहना है कि उनके प्रयासों से ही कई परिवारों को सरकारी सुविधाओं का लाभ मिल सका।
घटना के चश्मदीद बताए जा रहे मंटू कुमार ने दावा किया कि घटना वाले दिन सुबह करीब आठ बजे बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी गांव पहुंचे थे। उस समय गांव के लोग अपने दैनिक कार्यों में व्यस्त थे। उनके अनुसार, पुलिस ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी और वहां मौजूद लोगों को हटाकर क्षेत्र खाली करा दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ समय बाद गोली चलने की आवाज सुनाई दी, जिसके बाद भरत तिवारी के घायल होने की सूचना मिली।
मामले को लेकर गांव में लगातार विरोध की आवाजें उठ रही हैं। ग्रामीणों और परिजनों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष न्यायिक जांच कराने तथा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और सभी तथ्यों को सामने लाया जाएगा।
फिलहाल इस मामले में पुलिस और ग्रामीणों के दावों के बीच सच्चाई जांच का विषय बनी हुई है। प्रशासन की ओर से स्थिति पर नजर रखी जा रही है ताकि इलाके में शांति व्यवस्था बनी रहे।
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