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बिहार में शिक्षकों के मनमाने तबादलों पर लगेगी रोक, अब साल में सिर्फ एक बार होगा ट्रांसफर
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June 18, 2026
पटना। बिहार के विश्वविद्यालयों और अंगीभूत कॉलेजों में शिक्षकों के मनमाने तबादलों पर रोक लगाने के लिए राजभवन ने बड़ा फैसला लिया है। राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह द्वारा जारी निर्देश के अनुसार अब शैक्षणिक सत्र के बीच शिक्षकों का तबादला नहीं किया जाएगा। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक निरंतरता बनाए रखना तथा छात्रों की पढ़ाई को प्रभावित होने से बचाना है।
नई गाइडलाइन के तहत शिक्षकों के तबादले पूरे वर्ष किसी भी समय करने के बजाय केवल एक वार्षिक स्थानांतरण चक्र के माध्यम से किए जाएंगे। इसके लिए जून माह निर्धारित किया गया है, क्योंकि इस दौरान ग्रीष्मकालीन अवकाश रहता है और छात्रों की नियमित कक्षाओं पर कोई असर नहीं पड़ता। यदि किसी विशेष परिस्थिति में जून के अलावा किसी अन्य समय स्थानांतरण आवश्यक होता है, तो उसके लिए कुलाधिपति सचिवालय की पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा। साथ ही स्थानांतरण का स्पष्ट लिखित औचित्य भी प्रस्तुत करना होगा।
राजभवन ने यह भी स्पष्ट किया है कि तबादला प्रक्रिया किसी भी प्रकार के निजी पूर्वाग्रह, पक्षपात या प्रतिशोध की भावना से प्रेरित नहीं होनी चाहिए। अब शिक्षकों के स्थानांतरण में छात्र-शिक्षक अनुपात, विषयवार शिक्षकों की उपलब्धता, स्वीकृत पदों की संख्या तथा आरक्षण एवं रोस्टर नियमों को आधार बनाया जाएगा। इससे प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनने की उम्मीद है।
जारी आदेश में कहा गया है कि सभी स्थानांतरण बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 और संबंधित परिनियमों के कानूनी प्रावधानों के अनुरूप ही किए जाएंगे। राजभवन ने राज्य के सभी कुलपतियों को निर्देश दिया है कि वे इन दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें।
शिक्षा जगत के जानकारों का मानना है कि इस फैसले से कॉलेजों में बार-बार होने वाले तबादलों के कारण कक्षाओं के बाधित होने की समस्या कम होगी। साथ ही स्थानांतरण से जुड़े विवादों और न्यायालयों में जाने वाले मामलों में भी कमी आएगी। राजभवन का यह कदम बिहार के उच्च शिक्षा संस्थानों में बेहतर शैक्षणिक वातावरण और प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
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