बिहार के 4 वर्षीय ग्रेजुएशन कोर्स में बड़ा बदलाव, राज्यपाल ने नए नियमों को दी मंजूरी

पटना: बिहार के उच्च शिक्षा क्षेत्र में बड़ा बदलाव किया गया है। राज्यपाल सह कुलाधिपति ने 'बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976' और 'पटना विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976' के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए 4-वर्षीय सीबीसीएस (CBCS) स्नातक पाठ्यक्रम के अध्यादेश और रेगुलेशंस में संशोधन को मंजूरी दे दी है। राज्यपाल सचिवालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार यह संशोधन 4 जुलाई 2026 से प्रभावी हो गया है। नए संशोधन के तहत स्नातक पाठ्यक्रम की अवधि (Programme Duration) और एग्जिट विकल्प (Exit Options) से जुड़े नियमों में बदलाव किया गया है। यह संशोधन पहले 15 मई 2023 को जारी अधिसूचना के तहत लागू नियमों में परिवर्तन करता है। इसका उद्देश्य नई शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप छात्रों को अधिक लचीली शिक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराना है। हालांकि, राज्यपाल सचिवालय ने स्पष्ट किया है कि यह संशोधित अध्यादेश फिलहाल पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय और मौलाना मजहरुल हक अरबी एवं फारसी विश्वविद्यालय पर लागू नहीं होगा। इन दोनों विश्वविद्यालयों को इस व्यवस्था से अस्थायी रूप से बाहर रखा गया है। इसके पीछे के प्रशासनिक या तकनीकी कारणों की आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है। नई व्यवस्था के तहत 4-वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम में छात्रों को निर्धारित चरणों पर एग्जिट ऑप्शन की सुविधा मिलेगी, जिससे वे जरूरत पड़ने पर पढ़ाई बीच में छोड़कर संबंधित प्रमाणपत्र प्राप्त कर सकेंगे और बाद में दोबारा पढ़ाई जारी रखने का अवसर भी मिलेगा। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला बिहार में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को प्रभावी ढंग से लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। राज्यपाल सचिवालय ने इस अधिसूचना की प्रतियां संबंधित विश्वविद्यालयों और विभागों को आगे की कार्रवाई के लिए भेज दी हैं। मिथिला हिन्दी न्यूज रिपोर्ट: रोहित कुमार सोनू
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